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Success Story: राजस्थान की इस फैमिली का जलवा, ननद बनीं RAS तो भाभी ने भी नहीं मानी हार, एक ही घर से निकलीं 2 महिला अफसर

Inspiring Women Success Story: कोटड़ी क्षेत्र में प्रेरणादायक सफलता की कहानी सामने आई है। पिंकी जैन ने आरएएस परीक्षा पास कर बहू के रूप में नई मिसाल कायम की। उनकी ननद सुरभि जैन पहले ही चयनित हैं। शादी के बाद भी पिंकी ने पढ़ाई जारी रखी और अब दोनों मिलकर समाज में बदलाव की नई उम्मीद बन गई हैं।

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RAS Success Story Bhilwara Nanad and Bhabhi crack Two women from one family rise to success

पिंकी जैन (पत्रिका फोटो)

RAS Success Story: कोटड़ी (भीलवाड़ा): कहते हैं अगर हौसलों में उड़ान हो और परिवार का साथ मिले, तो शादी के बाद भी सपने हकीकत में बदले जा सकते हैं। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है कोटड़ी तहसील के किशनगढ़ की बेटी और अमाल्दा गांव की बहू पिंकी जैन ने।

राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित आरएएस परीक्षा में सफलता हासिल कर पिंकी ने न केवल अपना सपना पूरा किया। बल्कि समाज की रूढ़ियों को तोड़ते हुए एक नई मिसाल पेश की है।

ननद पहले से ही प्रशिक्षण में, अब भाभी भी बनीं अफसर

इस सफलता की सबसे खूबसूरत कड़ी यह है कि पिंकी की ननद सुरभि जैन भी आरएएस 2023 में चयनित हो चुकी हैं और वर्तमान में जयपुर में प्रशिक्षण ले रही हैं।

ननद-भाभी की जोड़ी बनी कमाल

अब एक ही परिवार की दो बेटियों का राज्य की सबसे प्रतिष्ठित सेवा में चयन चर्चा का विषय बना हुआ है। क्षेत्रवासी इसे 'नंद-भाभी की जोड़ी' का ऐतिहासिक कमाल बता रहे हैं।

पिता ने दी आगे बढ़ने की प्रेरणा

पिंकी की यह उपलब्धि इसलिए भी ऐतिहासिक है, क्योंकि कोटड़ी क्षेत्र के जैन समाज में संभवतः वह पहली बहू हैं, जिन्होंने इस मुकाम को छुआ है। पिंकी के पिता सुरेश जैन (अध्यापक) ने बेटी को हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा दी, तो ससुराल में पति अरिहंत कोठारी और सास ने ढाल बनकर उनका साथ दिया।

पति का अटूट विश्वास

पिंकी जैन ने बताया कि सपनों को साकार करने में मेरे ससुराल पक्ष और पति का अटूट विश्वास सबसे बड़ी ताकत बना। मेरी ननद सुरभि की सफलता ने मुझे हमेशा प्रेरित किया कि मैं भी यह कर सकती हूं।

बेटियों और बहुओं के लिए बनीं प्रेरणा: पिंकी की सफलता की खबर मिलते ही किशनगढ़ और अमाल्दा सहित पूरे क्षेत्र में जश्न का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि पिंकी ने उन तमाम महिलाओं को रास्ता दिखाया है जो शादी के बाद अपनी पढ़ाई छोड़ देती हैं।