
भीलवाड़ा।
नगर परिषद सभापति पद से ललिता समदानी के नौ अक्टूबर को निलंबन के बाद से कुर्सी खाली पड़ी है। न तो किसी पार्षद को सभापति चुना गया और न ही प्रशासक नियुक्त किया गया है। परिषद के इतिहास में एेसा पहला मौका है, जब इतने दिन सभापति की कुर्सी खाली रही है। हालांकि कुर्सी पर काबिज होने के लिए उप सभापति मुकेश शर्मा ने भी खूब जोर लगाया, लेकिन स्वायत्त शासन निदेशालय की ओर से सभापति पद आरक्षित होने से किसी महिला पार्षद को ही कुर्सी पर बिठाने की मंशा के बाद अटकलों पर विराम लग गया है। इसके बाद भाजपा ने अंतर्कलह से बचने के लिए महिला पार्षदों का मतदान करवाया। इसमें वार्ड 20 की पार्षद दीपिका कंवर को भाजपा पार्षद दल नेता चुना गया। दीपिका का नाम सभापति के लिए भाजपा प्रदेश नेतृत्व को भेज दिया, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ी। इधर, सभापति पद खाली होने से परिषद के काम काम अटके हुए हैं। इससे आमजन को असुविधा हो रही है।
12 को नहीं मिली राहत, अब 25 को फिर सुनवाई
राज्य सरकार के निलंबन आदेश को समदानी ने 12 अक्टूबर को राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर में चुनौती दी। समदानी ने स्थगन आदेश की गुहार लगाई। मामले की सुनवाई में न्यायाधीश संदीप मेहता ने 25 अक्टूबर को सुनवाई की अगली तारीख दे दी।
भाजपा ने तय कर लिया नाम
सभापति पद के लिए नाम तय करने के लिए भाजपा जिलाध्यक्ष लक्ष्मीनारायण डाड के निवास पर बैठक हुई। इसमें भाजपा की सभी पांच महिला पार्षदों में से एक को सभापति के लिए मतदान कराया गया। इसमें 34 पार्षदों ने मतदान किया। दीपिका कंवर के नाम पर 16 ने सहमति जताई। जिला संगठन ने यह नाम प्रदेश नेतृत्व को भेज दिया था।
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हस्ताक्षर के लिए अजमेर जाएगी फाइल
परिषद आयुक्त धर्मपाल जाट ने जिला कलक्टर को पत्र लिखा है। इसमें अवगत कराया है कि शहर में रोडलाइट लगाने वाली कंपनी ईईएसएल के करीब नौ करोड़ रुपए बाकी है। इसके बिल पास हो गए, लेकिन सभापति के हस्ताक्षर नहीं होने से अटके हुए हैं। अब वे सभी फाइलें स्थानीय निकाय विभाग के उप निदेशक अजमेर को भेजी जाएंगी, जिन पर सभापति के हस्ताक्षर जरूरी हों।
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फाइल लेकर दौड़ेंगे कर्मचारी, खाली होगा खजाना
परिषद के कर्मचारी महत्वपूर्ण फाइलें उप निदेशक के हस्ताक्षर करवाने के लिए अजमेर की दौड़ जाएंगे। इस काम पर भी हजारों रुपए का टीए-डीए खर्च होगा।
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कब क्या हुआ
22 मई: भाजपा के असंतुष्ट पार्षदों के सीएम व कलक्टर से मिलने के बाद सभापति का विरोध बढ़ा।
26 जून: भाजपा जिलाध्यक्ष की मौजूदगी में सभापति को जयपुर बुलाकर इस्तीफा मांगा गया।
02 अगस्त: विधायक विट्ठलशंकर अवस्थी सुबह जयपुर गए। शाम को समदानी के पार्टी से निष्कासन का आदेश।
08 अगस्त: एसीबी ने सभापति व आयुक्त को बुलाया, लेकिन आयुक्त ही पहुंचे सभापति नहीं गई।
09अगस्त: सभापति ने खुद को बीमार बता एसीबी से समय मांगा।
13 अगस्त: छह दिन बाद सभापति एसीबी कार्यालय पहुंची और छह मिनट में लिखित में बयान दिया।
07 सितंबर: एसीबी में सभापति व तत्कालीन आयुक्त के खिलाफ पद के दुरुपयोग का मामला दर्ज।
09 अक्टूबर: सभापति सुबह एसीबी में बयान देने पहुंची, शाम को निलंबन आदेश।
12 अक्टूबर: हाइकोर्ट में सुनवाई, अगली सुनवाई के लिए 25 अक्टूबर मुकर्रर।
12 अक्टूबर: शाम को भाजपा जिलाध्यक्ष के घर मदतान। दीपिकाकंवर को चुना पार्षद दल का नेता।
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नगर परिषद में जो रूटीन के काम हैं वे हो रहे हैं। जहां तक वित्तीय मामलों की बात है, उनकी लंबित फाइलें अजमेर उपनिदेशक को भेजी जाएगी। हमने जिला कलक्टर व विभाग से मार्गदर्शन भी मांगा है।
धर्मपाल जाट, आयुक्त नगर परिषद