
निवर्तमान सरपंच संजय भंडिया और ग्राम विकास अधिकारी (सचिव) कजोड़मल गुर्जर की फोटो: पत्रिका
Rajasthan Crime News: भीलवाड़ा के मांडल ग्राम पंचायत में करोड़ों रुपए की बेशकीमती जमीन के पट्टों में हुए भारी घोटाले को लेकर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। राजस्थान पत्रिका में इस भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करने के बाद प्रशासन हरकत में आया। कलक्टर की अध्यक्षता में हुई जिला स्थापना समिति की बैठक में लिए निर्णयों और सीईओ जिला परिषद के निर्देशों के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की। पट्टा वितरण में गंभीर अनियमितताओं का दोषी मानते हुए ग्राम विकास अधिकारी (सचिव) कजोड़मल गुर्जर को निलंबित कर मुख्यालय बिजौलिया किया। सरपंच व प्रशासक संजय भंडिया के खिलाफ पंचायतीराज अधिनियम की धारा 38 के तहत कार्रवाई के लिए संभागीय आयुक्त को लिखा है।
सीईओ ने दोनों दोषियों सरपंच और सचिव के खिलाफ मांडल पुलिस थाने में मुकदमा दर्ज कराने को कहा है। प्रशासन ने बांटे गए 183 पट्टों की एक सप्ताह के भीतर निगरानी में लेने तथा रिपोर्ट दर्ज कराने को कहा है। जांच कमेटी ने इन पट्टों को नियम विरुद्ध और अवैध माना है। पद का दुरुपयोग कर चहेतों को फायदा पहुंचाने के खेल से राजकोष को नुकसान की भरपाई दोषियों से होगी।
प्रशासन की कार्रवाई का मुख्य आधार राजस्थान पत्रिका की खबरें रहीं। इन समाचारों पर कलक्टर, सीईओ और मांडल विकास अधिकारी ने संज्ञान लिया। 13 जून को पत्रिका ने उजागर किया कि चहेतों को बेशकीमती जमीन के 223 पट्टे बेहद रियायती दर पर बांटे। 24 जून को खुलासा किया कि बिना साइट प्लान और आराजी नंबर के पट्टे वितरित कर दिए। 25 जून को 100 से 1150 रुपए में चहेतों को बांट दिए बेशकीमती जमीन के पट्टे। शीर्षक से प्रमुखता से समाचारों का प्रकाशन हुआ।
निवर्तमान सरपंच संजय भंडिया के खिलाफ धारा 38 के तहत विभागीय जांच और कानूनी कार्रवाई की अनुशंसा की है। सचिव कजोड़मल के विरुद्ध संस्थापन शाखा विभागीय जांच करेगी। दोनों ने पद का दुरुपयोग करते हुए नियम 158 की अवहेलना की और बिना उचित प्रक्रिया के निःशुल्क पट्टे जारी किए। इनसे राशि की वसूली होगी।
गुलाब सिंह गुर्जर, विकास अधिकारी, पंचायत समिति मांडल
Updated on:
27 Jun 2026, 9:00 AM IST
Published on:
27 Jun 2026, 8:43 AM IST
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