
मांडल मेजा मार्ग पर स्थित जमीन, जिसके पट्टे बांट दिए। फोटो: पत्रिका
Mandal Lease Deed Scam: भीलवाड़ा। भूमिहीन और घुमंतू परिवारों को मिलने वाली निशुल्क सरकारी जमीन पर पंचायत के नुमाइंदों ने डाका डाल दिया। भीलवाड़ा जिले की मांडल ग्राम पंचायत में हाइवे और मेजा मार्ग पर स्थित बेशकीमती जमीन के पट्टे महज 100 से 1150 रुपए में चहेतों को रेवड़ियों की तरह बांट दिए। कई भूखंड पूरी तरह नि:शुल्क आवंटित कर दिए। यह कारनामा ग्राम पंचायत सरपंच-प्रशासक संजय भंडिया और ग्राम विकास अधिकारी कजोड़ मल गुर्जर की मिलीभगत से अंजाम दिया गया।
नियमानुसार नि:शुल्क पट्टा केवल भूमिहीन, घुमंतू जाति या गाड़िया लोहार परिवार को दिया जा सकता है। लेकिन, सरपंच और वार्ड पंचों ने कायदे-कानून ताक पर रख दिए। जिन लोगों को पट्टे जारी किए, उनका उन जमीनों पर पहले से कोई कब्जा तक नहीं था। शिकायत पर हुई प्रारंभिक जांच में 193 पट्टों की बंदरबांट सामने आई है।
जिस पंचायत पर ग्रामीणों के हितों की रक्षा की जिम्मेदारी थी, उसी के वार्ड पंचों ने पद का दुरुपयोग कर अपनी पुत्री, पुत्र, भाई-भाभी और पुत्रवधू के नाम पट्टे जारी करवाए। भाजपा से पंचायत समिति सदस्य का चुनाव लड़ी और कांग्रेस से जीती महिला के पुत्र के साथ कई पेंशनधारी सरकारी कर्मचारियों के बेटे-बेटियों को भी पट्टे दिए गए। उधर, ग्रामीण सालों से पट्टों के लिए पंचायत के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन जनप्रतिनिधियों ने मिलीभगत कर सरकारी जमीनें अपने ही परिवारों में बांट लीं।
पहली जांच से असंतुष्ट होने पर सरपंच-प्रशासक ने जिला परिषद के सीईओ से उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी। एक माह तक जांच आदेश ठंडे बस्ते में रहा, लेकिन राजस्थान पत्रिका में 13 जून को बेशकीमती जमीन के 223 पट्टे रियायती दर बांट दिए चेहतों को तथा 24 जून को बिना साइट प्लान और आराजी नंबर के ही बांट दिए पट्टे, नियमों की उड़ी धज्जियां शीर्षक से प्रकाशित समाचार से खुलासा होने के बाद प्रशासन हरकत में आया।
बुधवार को विशेष जांच दल ग्राम पंचायत मांडल पहुंचा। टीम ने जब पट्टों की फाइलें और रिकॉर्ड खंगाले तो नियमों की खुलेआम उड़ती धज्जियां देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। जिला परिषद की ओर से गठित तीन सदस्य विशेष जांच दल में सुवाणा विकास अधिकारी जितेंद्र गुरनानी, आसींद विकास अधिकारी भंवर सिंह चारण और अतिरिक्त विकास अधिकारी जुगलकिशोर शर्मा शामिल थे। टीम ने बुधवार को मौके पर पहुंचर सरपंच प्रशासक व ग्राम विकास अधिकारी के बयान दर्ज किए।
सरपंच-प्रशासक के पहली जांच से संतुष्ट नहीं होने पर जिला परिषद से तीन सदस्यीय जांच दल गठित किया था। इस दल ने बुधवार को मांडल पहुंचकर प्रशासक व ग्राम विकास अधिकारी के बयान लिए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
-गुलाब सिंह गुर्जर, विकास अधिकारी, पंचायत समिति मांडल
Updated on:
25 Jun 2026 10:20 am
Published on:
25 Jun 2026 10:20 am
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