भीलवाड़ा

राजस्थान: नाजुक ‘जीविका’ की हर सांस उसकी जिंदगी के लिए जंग बन गई, 600 ग्राम की बच्ची को पालने में छोड़ गए मां-बाप

भीलवाड़ा के एमसीएच विंग के पालना घर में गुरुवार को 600 ग्राम की प्रीमैच्योर नवजात बालिका मिली। स्वचालित बेल बजते ही एनआईसीयू टीम ने उसे वेंटिलेटर पर रखकर उपचार शुरू किया। स्थिति नाजुक है। बाल कल्याण समिति ने बच्ची का नाम ‘जीविका’ रखा।

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Nov 14, 2025
पालने में छोड़ी 600 ग्राम की नवजात (फोटो- पत्रिका)

भीलवाड़ा: महात्मा गांधी जिला चिकित्सालय गुरुवार को एक ऐसी घटना का साक्षी बना, जिसने इंसानियत को झकझोर दिया और साथ ही उम्मीद की नई किरण भी जगाई। सुबह 11:32 बजे ‘पालना घर’ में किसी ने मात्र 600 ग्राम की एक प्रीमैच्योर नवजात बालिका को छोड़ दिया। बालिका इतनी नाजुक कि हर सांस उसकी जिंदगी के लिए जंग बन गई।

जैसे ही बालिका एमसीएच विंग के पालने में रखी गई, स्वचालित बेल बज उठी। एनआईसीयू टीम तुरंत हरकत में आई और बच्ची को अपनी गोद में लेकर जीवन बचाने की कोशिश शुरू की। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. इंदिरा सिंह चौहान ने जब नवजात को देखा तो स्थिति बेहद चिंताजनक थी।

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वजन सिर्फ 600 ग्राम, शरीर में कमजोरी और सांस लेने में अत्यधिक कठिनाई। फौरन उसे वेंटिलेटर पर रखा गया और अस्पताल का पूरा स्टॉफ उसकी हर सांस पर नजर रखे हुए हैं। फिलहाल, बालिका जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही है। लेकिन डॉक्टरों की मेहनत और दुआओं की डोर अभी भी मजबूत है।

बालिका का हुआ नामकरण

इस दर्दनाक घटना के बीच एक संवेदनशील पहल करते हुए बाल कल्याण समिति अध्यक्ष चंद्रकला ओझा ने नवजात को जीविका नाम दिया, जिसका अर्थ है जीवन का आधार। यह नाम अब उसकी पहचान के साथ उसकी उम्मीद भी बन गया है। अस्पताल अधीक्षक डॉ. अरुण कुमार गौड़ ने आमजन से अपील की है कि वे जीविका की सलामती के लिए दुआ करें। उन्होंने कहा कि यह नन्ही जान जीवन की यह कठिन जंग जीत सके।

संवेदनहीनता और मानवता एक साथ

यह घटना समाज की संवेदनहीनता की तस्वीर भी दिखाती है। जहां कोई अपनी नवजात को छोड़ चला गया। लेकिन उसी क्षण, चिकित्सक और नर्सों की संवेदनशीलता ने यह साबित कर दिया कि मानवता अब भी जीवित है। जीविका की हर सांस अब भी एक संघर्ष है। लेकिन उसकी कहानी, उम्मीद और इलाज कर रहे स्टॉफ की समर्पण भावना शायद उसे नई जिंदगी दे सके।

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Published on:
14 Nov 2025 01:24 pm
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