जागरूकता के दावे महज 48 दिन बाद मासूम शानू के दागे जाने से फेल ही नजर आए है
भीलवाड़ा।
महज डेढ माह पहले 21 अप्रेल को काछोला निवासी नाथूलाल कालबेलिया के दो माह के पुत्र दिनेश कालबेलिया की डाम लगाने से मौत हो गई थी। इस घटना के बाद चिकित्सा विभाग और विभिन्न संगठनों ने जागरूकता दिखाने के दावे किए थे, लेकिन ये जागरूकता के दावे महज 48 दिन बाद मासूम शानू के दागे जाने से फेल ही नजर आए है। कथित भोपों की गरम सलाखों पर अंध विश्वास का भूत चढ़ा हुआ है।
पुलिस व चिकित्सा विभाग के रिकार्ड बताते है कि जिले में इलाज के नाम पर डाम लगाने की घटनाएं कड़े कायदे कानून नहीं होने से थम नहीं सकी है। सरकारी दावे है कि विभिन्न संगठनों, विधिक एवं साक्षरता समिति, आगंनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मदद से ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को जागरूक किया जा रहा है। लेकिन ये सरकारी समझाइस कागजों में ही सिमट कर रह गई है। आंकड़े बताते हैं कि गत दो वर्ष में जिले में डाम लगाने की एक दर्जन से अधिक घटना में चार मासूम बच्चों की मौत हो चुकी है।
अंध विश्वास ने ले ली ये जानें
11 जनवरी 2017 को बनेड़ा थाना क्षेत्र में आमली निवासी निवासी जमना लाल बैरवा की दो वर्षीय पुत्री पुष्पा को डाम लगाया। उपचार के दौरान 14 जनवरी को मौत।
- 25 मार्च 2017 को रायपुर थाना क्षेत्र के गुर्जरों का खेड़ा के मनोहर सिंह रावत की दस माह की पुत्री आशा की डाम लगाने से मौत। रायपुर थाना पुलिस ने मामला दर्ज।
- 21 अप्रेल 2018 काछोला निवासी नाथूलाल कालबेलिया के दो माह के पुत्र दिनेश के निमोनिया होने पर कथित भोपों ने डाम लगाया। बाद में उसकी मौत हो गई।
वर्ष 2017 में सर्वाधिक घटना
11 जनवरी 2017 को सुवाणा क्षेत्र उणीखेड़ा में देवीलाल बागरिया के चार माह की पुत्री माया को भी डाम लगाया गया। इसका मामला सदर थाने में दर्ज है। कोई पुख्ता कार्रवाई नहीं।
-29 जनवरी 2017 को गंगापुर थाना क्षेत्र के चावण्डिया गांव निवासी मुकेश बैरवा के एक वर्षीय पुत्र राजू के डाम लगवा दिया।
-30 जनवरी 2017 को भीलवाड़ा के चपरासी कॉलोनी निवासी भगवान की तीन माह की पुत्री निमोनिया की शिकायत पर एमजी चिकित्सालय में भर्ती कराया। बच्ची के पेट पर दागने के निशान थे।
बढ़ती घटनाएं चिंतनीय
बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष डॉ. सुमन त्रिवेदी ने बताया कि जिले में डाम लगाने की घटना बढऩा चिंतनीय है। पुलिस ने डाम लगाने वाले आरोपितों के खिलाफ कर्रवाई भी की है। बावजूद एेसी घटना नहीं थम रही है, इसके लिए ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को अब जागरूक करने की जरूरत है। बाइट सुमन त्रिवेदी, अध्यक्ष महिला एवं बाल कल्याण समिति