भीलवाड़ा

विधायक बने सांसद की कुर्सी भी मिली, माथुर व सिंह पहुंचे उच्च पदों तक

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Domination of public representatives in bhilwara
Domination of public representatives in bhilwara

नरेन्द्र वर्मा ।
भीलवाड़ा. विधानसभा चुनाव की घोषणा होने के साथ ही जिले में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। जातीय, सामाजिक, भोगौलिक, आर्थिक समीकरण बनने लगे है। इसी हलचल में जिले में अब तक हुए विधानसभा चुनावों के हार-जीत के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो कई रोचक व चौंकाने वाले तथ्य सामने आएंगे।


जिले की राजनीतिक माटी की तासीर ही एेसी रही कि यहां से निर्वाचित कई जनप्रतिनिधियों का देश में डंका बजा। खासकर पांच विधायक सांसद तक बने। इनमें से मांडलगढ़ से सात बार विधायक रहे शिवचरण माथुर सांसद के साथ ही दो बार मुख्यमंत्री बने। इसके बाद असम के राज्यपाल भी रहे। आसींद से चार बार विधायक रहे वीपी सिंह बदनोर भी दो बार लोकसभा व एक बार राज्यसभा सांसद रहे। वे मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत के कार्यकाल में सिंचाई मंत्री बने और और अब पंजाब के राज्यपाल हैं। इसके साथ ही वे कई संसदीय समितियों में रहकर योगदान दे चुके हैं।

शिवचरण माथुर
जिले की राजनीति में शिवचरण माथुर मील का पत्थर साबित हुए। उन्होंने आठ बार विधानसभा चुनाव लड़ा और मात्र एक बार हारे। उनका राजनीतिक गढ़ मांडलगढ़ क्षेत्र रहा। यहां से वे वर्ष 1972, 80, 85, 90, 98 व 2003 में जीते। इसी प्रकार 1967 में मांडल में भी वे विजय रहे। उन्होंने एक मात्र चुनाव 1977 में मांडलगढ़ सीट से हारा। वे 1981 से 1985 तक और फिर 1989 से 1989 तक मुख्यमंत्री रहे। वे 1991-1996 तक सांसद भी रहे। 2008 में असम के राज्यपाल के रूप में नियुक्त किए गए। वे 25 जून 2009 को असामयिक निधन तक असम के राज्यपाल पद पर रहे।
सीपी जोशी
सीपी जोशी वर्ष 2009 से 2014 तक जिले के सांसद रहे। वो इससे पूर्व राजसमंद जिले में नाथद्वारा से विधायक भी रहे।

वीपी सिंह बदनोर

वीपी सिंह बदनोर का राजनीतिक क्षेत्र आसीन्द विधानसभा क्षेत्र रहा। यहां से वे 1998, 1993,1985, 1977 में भाजपा के टिकट से विधायक रहे। वर्ष 1990 में उन्हें जीत नसीब नहीं हुई। वर्ष 1998 में वे मुख्यमंत्री भैरोंसिंह के कार्यकाल में सिंचाई मंत्री रहे। सिंह ने इसके बाद भीलवाड़ा संसदीय क्षेत्र का रुख किया। 1999-2004 तथा 2004-2009 में सांसद रहे। इसी प्रकार वर्ष 2010 से 2016 तक राज्यसभा सदस्य रहे। सिंह इसके बाद केन्द्र ने उन्हें 22 अगस्त 2016 को पंजाब का राज्यपाल नियुक्त किया। वो अभी चंडीगढ़ प्रशासक का कार्य भी संभाले हुए हैं।

सुभाष बहेडि़या
भाजपा के वरिष्ठ नेता सुभाष बहेडि़या ने एक मात्र विधानसभा चुनाव भीलवाड़ा सीट से वर्ष 2003 में लड़ा और जीते। इसके बाद वे सांसद बने। बहेडि़या वर्ष 1996-1998 तक भी सांसद रहे और वर्ष 2014 में फिर जीत और अभी भीलवाड़ा से सांसद हैं।

रामपाल उपाध्याय
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रामपाल उपाध्याय का राजनीतिक क्षेत्र सहाड़ा-रायपुर क्षेत्र रहा। उन्होंने वर्ष 1980, 1985, 1993 में चुनाव जीते, जबकि एक बार निराशा हाथ लगी। वे 1980 में जगन्नाथ पहाडि़या मंत्रिमंडल में उप मंत्री रहे। हरिदेव जोशी मंंत्रिमंडल में सहकारिता व शिक्षा मंत्री बने। उपाध्याय ने दो बार सांसद का चुनाव लड़ा, एक चुनाव जीता और वे 1998 से 99 तक तेरह माह के लिए सांसद रहे।

गिरधारीलाल व्यास

प्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं में गिरधारीलाल व्यास का नाम शुमार था। आसीन्द से 1967 व 1962 में जीते, जबकि वर्ष 1972 में उन्होंने ये सीट गंवाई। वे साठ के दशक में कांग्रेस सरकार के मुख्य सचेतक भी रहे। इसके बाद वे संसदीय चुनाव मैदान में उतरे। उन्होंने तीन चुनाव लड़े, वो वर्ष 1980 व 1984 में विजयी रहे।

Updated on:
20 Oct 2018 03:00 am
Published on:
20 Oct 2018 08:13 am