भीलवाड़ा

बजट से उम्मीद: उद्योगों की राह हो आसान, कलक्टर को मिले सुपर पाॅवर

जयपुर के चक्कर से मिले मुक्ति राजस्थान में औद्योगिक निवेश को रफ्तार देने और ‘लाल फीताशाही’ खत्म करने के लिए सरकार को बजट में बड़े प्रशासनिक सुधारों पर ध्यान देना होगा। उद्यमियों ने सरकार से कहा कि अगर सिंगल विंडो सिस्टम को हकीकत बनाना है, तो शक्तियों का विकेंद्रीकरण करना होगा। बजट के लिए भेजे […]

2 min read
Feb 06, 2026
To ease the path for industries, the collector has been given super powers.

जयपुर के चक्कर से मिले मुक्ति

राजस्थान में औद्योगिक निवेश को रफ्तार देने और 'लाल फीताशाही' खत्म करने के लिए सरकार को बजट में बड़े प्रशासनिक सुधारों पर ध्यान देना होगा। उद्यमियों ने सरकार से कहा कि अगर सिंगल विंडो सिस्टम को हकीकत बनाना है, तो शक्तियों का विकेंद्रीकरण करना होगा। बजट के लिए भेजे प्रस्तावों में सबसे बड़ी मांग जमीन आवंटन और भू-रूपांतरण की शक्तियों को लेकर है। मांग की गई है कि राजस्व विभाग की शक्तियों को जयपुर में केंद्रित रखने के बजाय जिला कलक्टर को ज्यादा पाॅवरफुल बनाया जाए। कलक्टर को अब 2 लाख के बजाय 6 लाख स्क्वायर मीटर तक की कृषि भूमि को इंडस्ट्रियल करने का अधिकार मिलना चाहिए।

मौजूदा अड़चन: विस्तार में रोड़ा बन रहे पुराने नियम

उद्यमियों का कहना है कि मौजूदा नियमों में इंडस्ट्री विस्तार करना चाहती है, तो नई जमीन के आवेदन में पुरानी आवंटित जमीन को भी जोड़ लिया जाता है। इससे क्षेत्रफल 2 लाख स्क्वायर मीटर से ऊपर चला जाता है और फाइल जिले से निकलकर जयपुर में अटक जाती है।

ये 5 बड़े बदलाव बदल देंगे प्रदेश की औद्योगिक तस्वीर

राजस्थान औद्योगिक क्षेत्र आवंटन नियम-1959 में संशोधन के प्रस्ताव भेजे हैं। इनमें पांच महत्वपूर्ण बिन्दुओं को शामिल किया गया है।

1. जमीन आवंटन

  • यह है नियम: वृहद उद्योगों को जमीन आवंटन जयपुर से होता है।
  • यह हो बदलाव: सभी श्रेणी के उद्योगों के लिए 6 लाख वर्ग मीटर तक आवंटन का अधिकार जिला कलक्टर को मिले।

2. उद्योग स्थापना अवधि

  • यह है नियम: 2 वर्ष की अवधि बढ़ाने के लिए अंततः राज्य सरकार के पास जाना पड़ता है।
  • यह हो बदलाव: रीको की तर्ज पर 3 वर्ष की अवधि मिले। आगे 3 वर्ष और बढ़ाने का हक कलक्टर को हो।

3. प्रोडक्ट चेंज

  • यह है नियम: लघु-मध्यम उद्योगों का प्रोडक्ट बदलने की शक्ति जयपुर (राजस्व विभाग) के पास है।
  • यह हो बदलाव: उत्पाद परिवर्तन की अनुमति का पूरा अधिकार जिला कलक्टर को दिया जाए।

4. सब-डिवीजन

  • यह है नियम: नियम-9 के तहत प्लॉट के टुकड़े करने का अधिकार राज्य सरकार के पास है।
  • यह हो बदलाव: आवंटित भूखंड को विभाजित/उप-विभाजित करने का अधिकार कलक्टर को मिले।

5. सब-लेटिंग

  • यह है नियम: आवंटित जमीन को किराए पर देने का कोई प्रावधान नहीं है।
  • यह हो बदलाव: रीको की तरह इंडस्ट्रियल जमीन को किराए पर देने का प्रावधान बने और मंजूरी जिला कलक्टर दे।

क्यों जरूरी है बदलाव

मेवाड़ चैम्बर के महासचिव आरके जैन का कहना है कि वर्तमान में लैंड कन्वर्जन और प्रोडक्ट चेंज की सैकड़ों फाइलें राज्य स्तर पर पेंडिंग हैं। छोटी-छोटी मंजूरियों के लिए उद्यमियों को जयपुर के चक्कर काटने पड़ते हैं। यदि बजट में 6 लाख स्क्वायर मीटर तक की पावर कलक्टर को दी जाती है, और सब-डिविजन जैसे अधिकार जिलों में शिफ्ट होते हैं, तो यह सही मायनों में 'सिंगल विंडो सिस्टम' की जीत होगी।

Updated on:
06 Feb 2026 08:58 am
Published on:
06 Feb 2026 08:57 am
Also Read
View All

अगली खबर