जयपुर के चक्कर से मिले मुक्ति राजस्थान में औद्योगिक निवेश को रफ्तार देने और ‘लाल फीताशाही’ खत्म करने के लिए सरकार को बजट में बड़े प्रशासनिक सुधारों पर ध्यान देना होगा। उद्यमियों ने सरकार से कहा कि अगर सिंगल विंडो सिस्टम को हकीकत बनाना है, तो शक्तियों का विकेंद्रीकरण करना होगा। बजट के लिए भेजे […]
राजस्थान में औद्योगिक निवेश को रफ्तार देने और 'लाल फीताशाही' खत्म करने के लिए सरकार को बजट में बड़े प्रशासनिक सुधारों पर ध्यान देना होगा। उद्यमियों ने सरकार से कहा कि अगर सिंगल विंडो सिस्टम को हकीकत बनाना है, तो शक्तियों का विकेंद्रीकरण करना होगा। बजट के लिए भेजे प्रस्तावों में सबसे बड़ी मांग जमीन आवंटन और भू-रूपांतरण की शक्तियों को लेकर है। मांग की गई है कि राजस्व विभाग की शक्तियों को जयपुर में केंद्रित रखने के बजाय जिला कलक्टर को ज्यादा पाॅवरफुल बनाया जाए। कलक्टर को अब 2 लाख के बजाय 6 लाख स्क्वायर मीटर तक की कृषि भूमि को इंडस्ट्रियल करने का अधिकार मिलना चाहिए।
उद्यमियों का कहना है कि मौजूदा नियमों में इंडस्ट्री विस्तार करना चाहती है, तो नई जमीन के आवेदन में पुरानी आवंटित जमीन को भी जोड़ लिया जाता है। इससे क्षेत्रफल 2 लाख स्क्वायर मीटर से ऊपर चला जाता है और फाइल जिले से निकलकर जयपुर में अटक जाती है।
राजस्थान औद्योगिक क्षेत्र आवंटन नियम-1959 में संशोधन के प्रस्ताव भेजे हैं। इनमें पांच महत्वपूर्ण बिन्दुओं को शामिल किया गया है।
मेवाड़ चैम्बर के महासचिव आरके जैन का कहना है कि वर्तमान में लैंड कन्वर्जन और प्रोडक्ट चेंज की सैकड़ों फाइलें राज्य स्तर पर पेंडिंग हैं। छोटी-छोटी मंजूरियों के लिए उद्यमियों को जयपुर के चक्कर काटने पड़ते हैं। यदि बजट में 6 लाख स्क्वायर मीटर तक की पावर कलक्टर को दी जाती है, और सब-डिविजन जैसे अधिकार जिलों में शिफ्ट होते हैं, तो यह सही मायनों में 'सिंगल विंडो सिस्टम' की जीत होगी।