भीलवाड़ा

Ayodhya Ram Mandir: भगवान श्रीराम के मंदिर निर्माण की राह में शहीद हुए सुरेश-रतन के परिजन को मिली इतनी बड़ी खुशी, जानें पूरा मामला

Ayodhya Ram Mandir: घटना 12 मार्च 1991 की है, जब पूरे देश की तरह भीलवाड़ा में भी अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण को लेकर कारसेवक रैली निकालने की तैयारी कर रहे थे। बड़ी संख्या में लोग सांगानेरी गेट पर एकत्र थे। कारसेवक रैली कलक्ट्रेट तक निकालना चाह रहे थे। पुलिस-प्रशासन को इससे ऐतराज था।
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Updated: 7 Jan 2024, 9:39 AM IST
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सुरेश जैन
Ayodhya Ram Mandir : घटना 12 मार्च 1991 की है, जब पूरे देश की तरह भीलवाड़ा में भी अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण को लेकर कारसेवक रैली निकालने की तैयारी कर रहे थे। बड़ी संख्या में लोग सांगानेरी गेट पर एकत्र थे। कारसेवक रैली कलक्ट्रेट तक निकालना चाह रहे थे। पुलिस-प्रशासन को इससे ऐतराज था। इसी दौरान कारसेवकों को तितर बितर करने के लिए पुलिस ने गोलियां चला दी। इसमें भीलवाड़ा निवासी कारसेवक सुरेश जैन व शाहपुरा जिले के खामोर निवासी रतनलाल सेन शहीद हो गए। भीलवाड़ा में कर्फ्यू लगा दिया गया। शहीदों के परिजन उस दिन की घटना याद करके ही सहम जाते हैं, लेकिन अयोध्या में 22 जनवरी को श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का न्योता मिलने से उत्साहित हैं। दोनों शहीदों के परिवारों को अनौपचारिक न्योता मिल चुका है। औपचारिक रविवार तक मिलेगा। सांगोनरी गेट में दोनों कारसेवकों की याद में स्मारक बनाया गया है।

भाई की स्मृतियां लेकर जाऊंगा अयोध्या
भीलवाड़ा की संजय कॉलोनी निवासी शान्तिलाल जैन बोले, भाई सुरेश जैन आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन उसकी यादें जिंदा है। भगवान श्रीराम की जन्मभूमि के लिए शहीद होना गौरव का विषय है। 22 जनवरी को अयोध्या जरूर जाऊंगा। अपने शहीद भाई सुरेश की स्मृतियां साथ ले जाऊंगा। शांतिलाल के साथ भतीजा दिलीप जैन भी अयोध्या में श्रीराम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होंगे। दोनों 19 जनवरी काे कोटा से अयोध्या की गाड़ी पकड़ेंगे। श्रीराममंदिर का निर्माण परिवार के लिए गौरव के क्षण हैं।

गौरव की बात है अयोध्या का न्योता
खामौर निवासी रतनलाल सेन के पुत्र महावीर सेन ने बताया कि वे मित्र के साथ 19 जनवरी को कोटा से अयोध्या की गाड़ी पकड़ेंगे। अयोध्या जाने की तैयारी पहले से ही थी। सैलून शॉप चलाने वाले महावीर बोले, पिता रतनलाल के गोली लगी तब साथ था। भगवान श्रीराम के लिए शहीद होना गर्व की बात है लेकिन परिवार पर दुखों का पहाड़ भी टूट पड़ा। आज जब देश के गिने चुने लोगों को अयोध्या बुलाया जा रहा है, उसमें हमें जगह मिली तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा। परिवार के लिए गौरव के पल हैं।

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