दरअसल, हर साल आठ जनवरी को स्थापना दिवस के दिन ही दीक्षांत समारोह का आयोजन किया जाता है। इसकी तैयारियां छह महीने पहले सेे ही शुरू कर दी जाती हैं। डिग्रियां छपवाने और गोल्ड मेडल तैयार कराने के लिए विश्वविद्यालय टेंडर जारी करता है। लेकिन इस बार पूर्व कुलपति की ओर से टेंडर प्रक्रिया शुरू नहीं की गई। इसके बाद अक्टूबर में आचार संहिता लगने के बाद प्रक्रिया अटक गई। दिसंबर में आचार संहिता खत्म होने के बाद विश्वविद्यालय ने टेंडर निकाला, लेकिन एक भी फर्म टेंडर में शामिल नहीं हुई। इस कारण डिग्रियां नहीं छपी।