बाजरा, मक्का व कपास की बुवाई का रहेगा रुझान
एक माह से पड़ रही गर्मी के बाद जिले के खेतों की मिट्टी तपकर तैयार हो गई है किसान खेतों में मेड से खरपतवार हटाने और खेती के उपकरणों को तैयार करने में जुटे हुए हैं। किसानों को अच्छी बारिश की उमीद है। कृषि विभाग ने बुवाई को देखते हुए खाद-बीज की व्यवस्था करनी शुरू कर दी है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए जिले के हर ब्लॉक में फसलों के प्रदर्शन लगाए जाएंगे। इसके लिए कृषि विभाग ने अधिकारियों को चयन करने के निर्देश दिए हैं। किसानों की मानें तो गत साल की तुलना में किसानों में इस बार मूंग व मोठ की बजाए खरीफ सीजन में दलहन के साथ तिलहन की फसल की बुवाई में किसानों का रुझान रहेगा।
5 लाख से ज्यादा किसान
जिले में करीब 5 लाख से ज्यादा किसान फसलों की बुवाई से सीधे तौर से जुड़े हुए हैं। इस बार खरीफ सीजन में 4.44 लाख हैक्टेयर में फसलों की बुवाई का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि पिछले साल 4.13 लाख हैक्टेयर में फसल बुवाई का लक्ष्य रखा था।
बाजरे की बुवाई भी करेंगे
किसानों के पशुपालन से जुड़ा होने के लिए किसान देसी किस्म के बाजरे की बुवाई करेंगे। सिंचाई की सुविधा वाले कई किसानों ने कपास व मूंगफली जैसी नकदी फसलों की बुवाई की है। लेकिन अधिकांश किसान इस बार प्री मानसून की बारिश के साथ ही अगेती बुवाई शुरू कर देंगे।
इसलिए ज्यादा रुझान
प्रगतिशील किसान बालू गाडरी ने बताया कि जिले में खरीफ की बुवाई का दौर जून-जुलाई में शुरू होता है। अभी जिले में कपास की बुवाई चल रही है। लेकिन मक्का, चावल, ज्वार, बाजरा, मूंग, उड़द, मूंगफली, तिल, सोयाबीन, गन्ना, ग्वार व अन्य फसलों की बुवाई होगी।
बीज वितरण जारी
कृषि विभाग की ओर से खरीफ सीजन में किसानों को मिनीकिट का आवंटन किया जा रहा है। किसानों को गुणवत्ता परक खाद-बीज मिले इसके लिए विशेष अभियान चलाया गया है। - विनोद कुमार जैन, संयुक्त निदेशक, कृषि विस्तार
बुवाई में भीलवाड़ा की स्थिति
आंकड़े हैक्टेयर में