भीलवाड़ा

School Roof Collapse: अब भीलवाड़ा में भरभरा कर गिरी सरकारी स्कूल की छत, आज ही के दिन पिपलोदी में गई थी 7 बच्चों की जान

Bhilwara School Roof Collapse: भीलवाड़ा में एक सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल के कमरे की छत गिर गई। रात में छत गिरने से बड़ा हादसा टल गया। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी स्कूल भवनों की सुरक्षा और उनकी समय पर मरम्मत को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए है।
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Bhilwara Government School Roof Collapse
भीलवाड़ा में सरकारी स्कूल की छत गिरी। फोटो: पत्रिका

भीलवाड़ा। जिले के हुरड़ा कस्बे के बस स्टैंड स्थित महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय में देर रात बड़ा हादसा होने से टल गया। विद्यालय के पुराने जर्जर भवन में स्थित प्राचार्य कक्ष की छत अचानक भरभरा कर गिर गई। गनीमत यह रही कि हादसा रात के समय हुआ और वहां कोई मौजूद नहीं था। इससे कोई जनहानि नहीं हुई। यदि यही घटना शनिवार सुबह स्कूल समय के दौरान होती, तो कोई भी बड़ा अनर्थ हो सकता था। बता दें कि झालावाड़ के पिपलोदी स्कूल हादसे को आज एक साल पूरा हुआ है, जहां जर्जर स्कूल भवन की छत भरभराकर गिरने से सात मासूम बच्चों की मौत हो गई थी।

पिपलोदी स्कूल त्रासदी की यादें अभी धुंधली भी नहीं पड़ी थीं कि राजस्थान में एक और सरकारी स्कूल की छत गिर गई। भीलवाड़ा में हुई इस घटना ने एक बार फिर सरकारी स्कूल भवनों की सुरक्षा और उनकी समय पर मरम्मत को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए है। हुरड़ा के कार्यवाहक सीबीईओ कृष्णपाल सिंह राठौड़ ने बताया कि यह भवन सालों पुराना था। जून माह में हुए सर्वे के दौरान ही इस भवन को पूरी तरह जर्जर बताकर इसकी मेजर रिपेयरिंग या इसे जमींदोज करने की आवश्यकता जताई गई थी।

इसके बाद जुलाई से इस कक्ष को बंद कर दिया गया था। सुरक्षा के लिहाज से जर्जर भवन के चारों ओर रस्सियां बांध दी गई थीं और प्रवेश वर्जित के चेतावनी बोर्ड भी लगा दिए गए थे। इस घटना ने शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जो जर्जर भवनों को समय रहते जमींदोज (ध्वस्त) कराने में ढिलाई बरत रहे हैं।

महज 50 फीट दूर चल रही हैं बच्चों की कक्षाएं

कार्यवाहक सीबीईओ के अनुसार पुराने भवन को जमींदोज करने की कागजी कार्रवाई अभी चल ही रही थी कि शुक्रवार रात यह ढह गया। चिंताजनक बात यह है कि जर्जर भवन से मात्र 50 फीट की दूरी पर ही बने नए कमरों में बच्चों की कक्षाएं संचालित हो रही हैं। नए भवन में जगह कम होने के कारण पुराने भवन के एक-दो कमरों का उपयोग अभी भी स्कूल का सामान रखने के लिए किया जा रहा था।

अधिकारियों ने लिया जायजा, मानसून में मंडरा रहा बड़ा खतरा

हादसे की सूचना मिलने के बाद शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। घटना की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर सीबीईओ व उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है। इस घटना ने इस बात का खुलासा कर दिया है कि कागजी कार्रवाई की सुस्ती के चलते बच्चे अब भी सुरक्षित नहीं हैं। जिले में इस मानसून सत्र में अब तक ज्यादा बारिश नहीं हुई है, लेकिन अगर तेज बारिश का दौर शुरू होता है, तो जिले भर में खड़े ऐसे कई अन्य जर्जर भवन भी गिर सकते हैं। विभाग को समय रहते ऐसे सभी जर्जर भवनों को गिराने की त्वरित कार्रवाई करनी होगी, ताकि नौनिहालों की जान को खतरे में पड़ने से बचाया जा सके।

Updated on:
25 Jul 2026 01:59 pm
Published on:
25 Jul 2026 01:55 pm