
Rajasthan : भीलवाड़ा. 57वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में लिए फैसले से भीलवाड़ा के व्यापारियों को दीपावली से पहले बड़ा तोहफा मिला हैं। इंस्पेक्टर राज को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए काउंसिल ने जीएसटी में गिरफ्तारी के प्रावधान हटा दिया। रिफंड, आईटीसी और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को सरल और ऑटोमेटेड कर दिया है। जीएसटी दरों में बदलाव साल में केवल एक बार ही किया जाएगा।
टेक्सटाइल हब भीलवाड़ा में हजारों व्यापारी और उद्योगपति जीएसटी की पेचीदगियों और रिफंड अटकने की समस्या से जूझते रहे हैं। काउंसिल की घोषणाओं, विशेषकर प्लांट व मशीनरी पर रिफंड, कर्मचारियों के बीमा पर आईटीसी और रास्ते में बार-बार मालवाहक वाहन न रोके जाने के फैसले से कपड़ा निर्यातकों, स्पिनिंग मिलों और घरेलू कपड़ा व्यापारियों को संजीवनी मिलेगी। रिटर्न में गलतियां सुधारने की छूट मिलने से क्लेरिकल गलतियों पर नोटिसों का झंझट भी खत्म होगा।
जीएसटी में गिरफ्तारी का अधिकार खत्म कर दिया है। अब एन्फोर्समेंट पूरी तरह से डेटा-आधारित होगा। अभियोजन की सीमा 1 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए कर दी और न्यूनतम सजा का प्रावधान हटेगा। सामान्य पेनल्टी 25 हजार रुपए से घटाकर 10 हजार रुपए कर दिया है। 10 हजार रुपए से कम की डिमांड पर व्यापारियों को नोटिस नहीं मिलेगा। कम जोखिम वाले आवेदकों को 3 दिन में रजिस्ट्रेशन मिलेगा। व्यापार के नाम या पते में बदलाव ऑटो-अपूय्ड होंगे। रिफंड की स्वीकृति 10 दिन में मिलेगी और 90 प्रतिशत रिफंड सिस्टम आधारित रिस्क असेसमेंट से बिना किसी अधिकारी के दखल के जारी होंगे।
कर्मचारियों के हेल्थ व लाइफ इंश्योरेंस, टेलीकॉम टावर, फैक्ट्री के बाहर की पाइपलाइन, फ्री सैंपल्स और नष्ट किए एक्सपायर्ड स्टॉक पर भी आईटीसी का लाभ मिलेगा। माल परिवहन के दौरान अब रूट के हर राज्य में बार-बार वाहनों की चेकिंग नहीं होगी। गाड़ी केवल खुफिया जानकारी और पूर्व अनुमति पर रोकी जाएगी। 1 नवंबर 2026 से इनपुट सर्विसेज का आईटीसी भी रिफंड में शामिल होगा। इसके अलावा 1 अप्रैल 2027 से प्लांट और मशीनरी के आईटीसी का रिफंड प्रति माह मिलने लगेगा। ई-कॉमर्स विक्रेता अब दूसरे राज्य के वेयरहाउस को अपना प्रिंसिपल प्लेस ऑफ बिजनेस बना सकेंगे। इससे पूरे देश में माल बेचना आसान होगा। 5 करोड़ तक के बी2बी व्यापारियों को सिर्फ सालाना रिटर्न भरने का विकल्प मिलेगा।
जीएसटी काउंसिल की बैठक के निर्णय व्यापार और उद्योग जगत के लिए ऐतिहासिक है। लंबे समय से हम यह मांग कर रहे थे कि छोटी-मोटी गलतियों पर व्यापारियों को अपराधी की तरह न देखा जाए। जीएसटी में गिरफ्तारी का प्रावधान पूरी तरह हटना और प्रोसिक्यूशन लिमिट 5 करोड़ रुपए करना एक बेहद साहसिक कदम है। इसके अलावा रिफंड प्रक्रिया को ऑटोमेटेड करना, फ्री सैपल्स पर आईटीसी देना और प्लांट व मशीनरी पर रिफंड की सुविधा शुरू होना, भीलवाड़ा के टेक्सटाइल उद्योगों की तरक्की में मील का पत्थर साबित होगा।
आरके जैन, महासचिव, मेवाड़ चैम्बर ऑफ कामर्स