वस्त्रनगरी के रामधाम चल रही रासलीला का मंचन अन्तरराष्ट्रीय स्तर के कलाकार कर रहे हैं
भीलवाड़ा.
वस्त्रनगरी के रामधाम चल रही रासलीला का मंचन अन्तरराष्ट्रीय स्तर के कलाकार कर रहे हैं। 30 से अधिक कलाकारों में एक भी महिला इस रासलीला में किसी तरह का मंचन नहीं कर रही है। महिलाओं का रोल भी वृंदावन से आए कलाकर ही कर रहे हैं। खास बात तो यह है कि दर्शक इनकी कला को भगवान की रासलीला मानकर पूजते हैं।
वृंदावन के स्वामी फतेह कृष्ण शर्मा ने बताया कि वे श्रीराधा कृष्ण रासलीला संस्थान से जुड़े हैं। इसकी शुरूआत १९७१ में हुई थी। वृंदावन के गांव-गांव जाकर रासलीला करते थे। इस संस्थान से एक से बढ़कर एक कलाकार जुड़ते गए। आज इस संस्थान से ३० से अधिक कलाकार जुड़े हुए हैं।
रासलीला देख कई संत बन गए
शर्मा ने बताया कि रासलीला का मंचन श्रृद्धा व भाव से किया जाता है। कई दर्शक तो रासलीला देखकर ही वृंदावन में संत बन गए है। पंजाब के एक व्यक्ति के संतान न होने पर रासलीला में घोषणा की थी कि अगर मेरे संतान होगी तो एक को वृंदावन में छोड़ दूंगा। इसके बाद पंजाबी व्यक्ति के तीन संतान हुई। उसमें से एक को वृंदावन में छोड़ दिया था जो आज वहां के सन्त हैं। रासलीला के सभी कलाकार ब्राह्मण है। इस संस्थान को 1994 में राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा ने सम्मानित किया था। उसके बाद कई सम्मान मिल चुके हैं।
विदेशों में भी कर चुके रासलीला
स्वामी फतेह कृष्ण शर्मा ने पत्रिका को बताया कि रासलीला का मंचन देश के कई शहरों में करने के साथ ही १४ अन्य देशों के १८ शहरों में मंचन किया है। इनमें मुख्य रूप से जर्मनी, फ्रांस, पेरिस, यूरोप, ब्राजील, हांगकांग थाईलैण्ड, स्वीटजरलैण्ड देश शामिल हैं।
ढाई घंटे तक जमे रहे पूर्व राष्ट्रपति
शर्मा ने बताया कि दिल्ली में आयोजित रासलीला को देखने के लिए राष्ट्रपति आर वेंकटरमन को निमंत्रण दिया था। उन्होंने बड़ी मुश्किल से मात्र दस मिनट का समय दिया था। लेकिन जब वे रासलीला देखने लगे तो ढाई घंटे तक वहीं पर रूके तथा इसकी प्रशंसा करते हुए कहा था कि पहली बार इस तरह की जीवन्त रासलीला देखने को मिली।