जिला अस्पताल की मातृ एवं शिशु इकाई में डॉक्टरों की कमी के चलते महिलाओं को परामर्श के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है
भीलवाड़ा।
जिला अस्पताल की मातृ एवं शिशु इकाई में डॉक्टरों की कमी के चलते महिलाओं को परामर्श के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। यहां डॉक्टर कम है और इलाज के लिए आने वाली महिलाएं ज्यादा। यूनिट में सोमवार को आउटडोर समय में 185 गर्भवती महिलाओं का पंजीयन हुआ, जबकि इनको देखने के लिए डॉक्टर एक ही था। जिले के दूरदराज इलाके से आई महिलाओं को सुबह से दोपहर तक इंतजार करना पड़ा।
जिलेभर से गर्भवती महिलाएं परामर्श के लिए पहुंची, लेकिन आउटडोर में केवल एक डॉक्टर के मौजूद होने से उन्हें परामर्श लेने में ही सुबह से दोपहर हो गई। भीड़ इतनी थी कि कई गर्भवती महिलाएं तो ज्यादा देर खड़ी ना रह सकी और परेशान होकर जमीन पर बैठ गई। प्रसव पीड़ा होने पर भर्ती होने से पहले डॉक्टर को दिखाने आउटडोर में पहुंची महिलाओं को भी इंतजार करने को मजबूर होना पड़ा। गायनिक चिकित्सक कक्ष के बाहर सात चिकित्सकों की नेम प्लेट लगी थी।
इनमें डॉ. मनीषा बहड़, डॉ. फरजाना सिद्धिकी, डॉ. मुकेश सुवालका, डॉ. नवीन भडाणा, डॉ. ममता गंगवाल, डॉ. सपना आसेरी, डॉ. रश्मि शर्मा का नाम था। लेकिन कक्ष में केवल एक डॉक्टर रश्मि शर्मा ही महिलाओं को परामर्श देते नजर आई। इन सात डॉक्टरों में से डॉ नवीन भडाणा की ड्यूटी ऑपरेशन थिएटर में थी, जबकि डॉ मनीषा बहड़ व डॉ ममता गंगवाल अवकाश और डॉ मुकेश सुवालका नाइट ऑफ पर थे। डॉ सुशीला आगीवाल को मांडलगढ़ में चिकित्सा शिविर में लगाया गया था। डॉ. फरजाना सिद्धिकी डे ड्यूटी पर थी। इन डॉक्टरों की एवज में अस्पताल प्रशासन ने कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की।
इनका कहना है
मैं अजमेर आया था मीटिंग में। गायनिक आउटडोर में डॉक्टर पूरे बैठे या नहीं इसकी जानकारी नहीं है। पता करवाता हूं।
डॉ. एसपी आगीवाल,
पीएमओ, एमजीएच
डॉक्टरों की कोई कमी नहीं है। कोई अमरजेन्सी आ गई होगी इसलिए चले गए होगे। मरीजों की ओर से कोई शिकायत भी नहीं आई।
डॉ. देवकिशन सरगरा, उपनियंत्रक, एमजीएच