मेडिकल कॉलेज का अंग बनने के बाद महात्मा गांधी चिकित्सालय की चिकित्सा व्यवस्था में लगातार सुधार आ रहा है
भीलवाड़ा।
मेडिकल कॉलेज का अंग बनने के बाद महात्मा गांधी चिकित्सालय की चिकित्सा व्यवस्था में लगातार सुधार आ रहा है।
चिकित्सकों की संख्या बढऩे से मरीजों को राहत मिल रही है, लेकिन मरीज को डॉक्टर तक पहुंचाने वाले ट्रॉलीमैन का अभाव है। परिजन इन ट्रॉलीमैन नहीं मिलने पर स्वयं ही स्ट्रेचर ढूंढकर मरीज को डॉक्टर के पास ले जाने को मजबूर है।
कई बार तो स्ट्रेचर भी नहीं मिलता है। एेसे में परिजन हाथों में उठाकर मरीज को डॉक्टर के पास ले जाते दिखाई देते है। कुछ माह पहले ही एक मरीज की स्ट्रेचर समय पर नहीं मिलने से अस्पताल के गेट पर ही मौत हो गई थी। बावजूद इसके अस्पताल प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया। आउटडोर में स्ट्रेचर भी एक ही है, एेसे में मरीज को उस पर ले जाने के बाद परिजन इलाज में व्यस्त हो जाते है ।
हड्डी रोग के मरीजों को ज्यादा परेशानी
अस्पताल के आउटडोर के हड्डी रोग विभाग के भी यही हालात है। यहां आने वाले मरीजों को भी स्ट्रेचर नहीं मिलने से परेशान होना पड़ता है। स्टे्रचर मिल जाती है तो डॉक्टर तक ले जाने के लिए ट्रॉलीमैन नहीं मिलता। हड्डी रोग विभाग का गेट तो खुला रहता है मगर वहां ना तो स्ट्रेचर रहती है और ना ट्रॉलीमैन मिलता है।
परेशानी ना हो इसके पूरे प्रयास किए जाएंगे
राजस्थान मेडिकल रिलीफ सोसायटी का नया गठन किया गया है। राज्य सरकार के नियमानुसार अब मेडिकल कॉलेज के प्रिंसीपल इसके अध्यक्ष होंगे। गुरूवार को उनके आने पर ट्रॉलीमैन सहित अन्य मेन पावर की कमी को उनके सामने रखा जाएगा। मरीजों को परेशानी ना हो इसके पूरे प्रयास किए जाएंगे।
डॉ. एसपी आगीवाल,प्रमुख चिकित्साधिकारी,महात्मा गांधी चिकित्सालय