भीलवाड़ा

Rajasthan: मुख्यमंत्री जन आवास योजना और 3081 भूखंडों की आवंटन लॉटरी में घोटाला, UIT सचिव पर गिरी गाज; मचा हड़कंप

Bhilwara UIT Scam: राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी और नगर विकास न्यास सचिव ललित गोयल को पदस्थापन आदेशों की प्रतीक्षा (एपीओ) में रखा है।

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सीएम भजनलाल शर्मा और आईएएस ललित गोयल। फोटो: पत्रिका

भीलवाड़ा। राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी और नगर विकास न्यास सचिव ललित गोयल को पदस्थापन आदेशों की प्रतीक्षा (एपीओ) में रखा है। कार्मिक विभाग के संयुक्त शासन सचिव धीरज कुमार सिंह ने रविवार को इसके आदेश जारी किए। 2019 बैच के आईएएस अधिकारी गोयल को आगामी आदेशों तक कोई नया पदभार नहीं सौंपा है।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर हुई कार्रवाई के बाद प्रशासनिक अमला हरकत में आया हुआ है। इस बड़ी कार्रवाई के पीछे मुख्य कारण मुख्यमंत्री जन आवास योजना (नेहरू विहार) में 25 प्रतिशत जमीन गैर-पार्टनर को देना और गत वर्ष सरकार की बहुप्रतीक्षित 3081 भूखंड आवंटन लॉटरी में भारी गड़बड़ी माना जा रहा है।

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न्यासकर्मियों की गड़बड़ी पर 80 हजार आवेदकों के सपनों पर पानी फिर गया था। इससे सरकार की काफी किरकिरी हुई। इन दोनों गड़बड़झाले में शामिल रहे नगर विकास न्यास के अधिकारी और कर्मचारियों में न्यास सचिव पर कार्रवाई के बाद हड़कंप मचा हुआ है। माना जा रहा है कि इन पर भी गाज गिर सकती है। न्यास की ओर से दोनों मामलों में हुए घोटाले को राजस्थान पत्रिका ने मुद्दा बनाया था। श्रृंखलाबद्ध खबरों का प्रकाशन कर मामले को उजागर किया। पत्रिका की खबर पर सरकार ने एक्शन लिया है।

राजस्थान पत्रिका ने प्रमुखता से उठाए थे मुद्दे

फर्जीवाड़ाः मुख्यमंत्री जनआवास योजना नेहरू विहार (तिलक नगर) प्रोजेक्ट: मुख्यमंत्री जनआवास योजना नेहरू विहार में नलवाया बाबेल दुग्गड़ (जेवी) के जरिए पार्टनर मोहम्मद उमर मंसूरी के नाम पर भूखंड के पट्टे जारी करने के गंभीर मामले को राजस्थान पत्रिका ने प्रमुखता से उठाया था। पत्रिका ने तथ्यों के साथ सिलसिलेवार खुलासे किए थे। इसमें यूआईटी में घोटालाः टेंडर व भुगतान फर्म को, करोड़ों की जमीन का पट्टा गैर-पार्टनर के नाम, अपनों को उपकृत करने के फेर में फंसा न्यास, करोड़ों की जमीन पर विवाद तथा फर्जीवाड़ाः जन आवास योजना में भविष्य से आया स्टाम्प, खरीदने से एक दिन पहले ही हो गई नोटरी। इन समाचारों के प्रकाशन के बाद यूआईटी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे।

लॉटरी में चेहतों के साथ अपने ही खोल दिए भूखंड: न्यास की ओर से 16 अक्टूबर को विभिन्न योजनाओं में 3081 भूखंडों की लॉटरी निकाली गई थी। इस लॉटरी प्रक्रिया में भी भारी गड़बड़ी सामने आई। आरोप लगाए गए कि न्यास के कर्मचारियों और अधिकारियों ने मिलीभगत कर अपने और चेहतों के नाम पर भूखंड निकाल लिए। यह विवादित मामला वर्तमान में राजस्थान उच्च न्यायालय विचाराधीन है और इसका फैसला आना अभी बाकी है।

आमजन की शिकायत पर सीएम का त्वरित संज्ञान

राजस्थान पत्रिका में इन घोटालों के प्रकाशित होने के बाद राजनीतिक हलकों में भी उबाल आ गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए आमजन ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को शिकायत की थी। पूरे प्रकरण में दोषी अधिकारियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग रखी। मुख्यमंत्री खबरों और आमजन की शिकायत पर तुरंत संज्ञान लिया और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए न्यास सचिव गोयल को तत्काल प्रभाव से एपीओ करने के आदेश जारी किए।

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