भीलवाड़ा

अब भीलवाड़ा में होगी इंटरल्यूकिन-6 की जांच

प्रदेश में एसएमएस के बाद भीलवाड़ा में अगले सप्ताह से मिलेगी यह सुविधा
2 min read
• •
Updated: 26 Aug 2020, 3:03 AM IST
Now Interleukin-6 will be investigated in Bhilwara
Now Interleukin-6 will be investigated in Bhilwara

भीलवाड़ा।
वस्त्रनगरी में जल्द ही कोरोना को लेकर इंटरल्यूकिन-6 की जांच शुरू होगी। यह जांच जयपुर एसएमएस के बाद भीलवाड़ा प्रदेश का पहला जिला होगा। जहां इसकी जांच होगी। जांच अगले सप्ताह में कोरोना के गंभीर रोगियों की शुरू हो जाएगी। इस जांच के माध्यम से यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा की इंटरल्यूकिन आईएल-6 प्रोटीन का कनेक्शन शरीर में अंदरूनी सूजन कितना है। कोरोना के गंभीर मरीजों में यह प्रोटीन अधिक होने पर सूजन की वजह बनता है। और अच्छे भले दिखने वाले मरीज को भी मौत की नींद सुला देता है। डाक्टरों के अनुसार कोरोनो वायरस के रोगी पहले खुद को बेहतर महसूस करते हैं लेकिन बाद में उनका इम्यून सिस्टम कमजोर होने लगता है। जो और कमजोर होते चले जाते हैं। इसके बाद उनका शरीर वायरस के अनुसार ही रिएक्ट करता है। इसको साइटोकिन स्टार्म कहा जाता है। पिछले कुछ दिनों के दौरान इसमें लगातार तेजी देखने को मिली है। स्पेक्ट्रोमीटर के माध्यम से ब्लड प्लाज्मा में प्रोटीन के पैटर्न को देखा जा सकेगा।
आईएल-6 की जांच से पता लगेगा मरीज की स्थिति
ब्लड टेस्ट के माध्यम से यह पता लगाया जा सकता है कि कोरोना से संक्रमित किस मरीज में मौत का खतरा ज्यादा है। आईएल-६ के माधमय से ब्लड में मौजूद ऐसे प्रोटीन का पता लगाया जाएगा जिसके स्तर को जानकर बताया जा सकता है कोविड-19 के मरीज की स्थिति सुधरेगी या और बिगड़ेगी। मरीज कितना बीमार होगा। कोरोना के मरीज को किस हद तक इलाज की जरूरत है, इन प्रोटीन के पैटर्न को देखकर पता लगाया जा सकता है। आईएल-6 का हाईलेवल रेसिपिरेटरी फेल्योर या मौत की वजह बनता है। वहीं इस खतरे को कम करती है। इस तरह की जांच के लिए उपकरण भी मंगवाए गए है।
मिशन सेव लाइफ
महात्मा गांधी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अरुण गौड़ ने बताया कि अगले सप्ताह से ही मिशन सेव लाइफ अभियान चलाया जाएगा। आईएल-6 की जांच बाद यह भी तय होगा की लाइफ सेविंग इंजेक्शन मरीज को लगाना है या नहीं। उनका मामना है कि पिछले कुछ दिनों से कोरोना में एक बार फिर बदलाव देखने को मिल रहा है। पिछले जिनों लगाकार एसिम्टोमैटिक मरीजों की संख्या ज्यादा आ रही थी, लेकिन अचानक अब इसमें गिरवाट आकर सिम्टोमैटिक मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इसमें भी ५० प्रतिशत मरीज हाईरिस्क वाले होते है। गौड़ ने बताया कि एसिम्टोमैटिक मरीज घरों पर रहकर उपचार ले सकते है। वे ऑक्सोमीटर के माध्यम से अपनी आक्सीजन लेवल को नापते रहे। लेवल ९० से नीचे आते ही अस्पताल में डाक्टर को दिखाना चाहिए। डॉ. गौड़ ने बताया कि मरीजों को जल्द ही प्लाज्मा देने का काम भी शुरू किया जाएगा।

Published on:
Also Read
View All