इतिहास को विकृत रूप में दिखाने वाली फिल्मों का प्रदर्शन नहीं होना चाहिए
भीलवाड़ा।
कुम्भलगढ़ के प्रसिद्ध कवि माधव दरक का मानना है कि इतिहास को विकृत रूप में दिखाने वाली फिल्मों का प्रदर्शन नहीं होना चाहिए। पद्मावति फिल्म को लेकर देश में चल रहे हालात ठीक नहीं है। इस फिल्म में फिल्मकार ने इतिहास के साथ छलावा किया है। कोई भी फिल्मकार इतिहास को चाहकर भी नहीं बदल सकता। रानी पद्मिनी ने अपने देश व मेवाड़ की शान और इज्जत बचाई है। एेसे में फिल्मकार भंसाली ने उसको जिस तरह से पेश किया है कि उसका मैं इसका खुले रूप से विरोध करता हूं। इस फिल्म को पर्दे पर ना दिखाया जाए।
दरक ने कवि सम्मेलनों में फूहड़ मजाक को भी गलत बताया। उन्होंने कहा कि आजकल के कवि सम्मेलनों में केवल हंसाने का काम हो रहा है। इसमें कविता नहीं होती है। कविता में जो भाव, भाषा, शैली, छन्द का ज्ञान होना चाहिए, वह नजर नहीं आता है। कवि सम्मेलन करते 56 साल हो गए है, लेकिन अब मंच पर आते हुए झिझक महसूस होती है। मंच से कविता नहीं केवल मनोरंजन परोसा जा रहा है।
पद्मावती फिल्म के विरोध में 24 को रैली
पद्मावती फिल्म के प्रसारण नहीं होने देने के लिए हनुमाननगर सर्वसमाज के प्रतिनिधियों ने रविवार को बैठक कर 24 नवम्बर को रैली निकालने का निर्णय लिया। राजपूत समाज के रणवीर सिंह ने बताया कि सर्वधर्म समाज के लोग 24 नवम्बर को बंगाली कॉलोनी स्थित माताजी मन्दिर में एकत्रित होंगे। सुबह 11 बजे विरोध रैली निकालकर ज्ञापन दिया जाएगा।
गांवों और ढाणियों तक विरोध की ज्वाला
फिल्म पद्मावती के प्रदर्शन पर रोक की मांग को लेकर विरोध की ज्वाला अब गांवों और ढाणियों तक भी पहुंच चुकी है। लोग एक स्वर में इतिहास के साथ तोड़ मरोड़ कर तथ्यों को पेश करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। जगह—जगह विरोध प्रदर्शन हो रहे है। लोग रैलियां निकाल विरोध जता रहे हैं।