भीलवाड़ा

मुखबिरी को​ निगल गई डिजिटल तकनीक तो पुलिस ने भी अपना लिया ये तरीका

मुखबिर तंत्र के जरिए संगीन वारदात में अपराधियों तक पहुंचने वाली पुलिस अब नई तकनीक का सहारा लेने लगी है
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Updated: 19 Jun 2018, 9:13 AM IST
Police resort to new technology in bhilwara
Police resort to new technology in bhilwara

भीलवाड़ा।

मुखबिर तंत्र के जरिए संगीन वारदात में अपराधियों तक पहुंचने वाली पुलिस अब नई तकनीक का सहारा लेने लगी है। पुलिस के परम्परागत मुखबिर तंत्र पर अब डिजिटल तकनीक भारी पडऩे लगी है। अब मोबाइल, लेपटॉप, रिकॉर्डिंग, सीसी कैमरे, लाइव लोकेशन आदि नई तकनीक का सहारा लेकर पुलिस अपराधियों की गिरेबां नाप रही। जिला पुलिस भी इससे अछूती नहीं रही है। मुखबिरों के बजाए पुलिस महकमे ने भी आधुनिक तकनीकी का दामन थाम लिया है।

उन पर ज्यादा भरोसा किया जा रहा है। जिले में कुछ समय में देखा जाए तो हत्या, लूट जैसी संगीन वारदातें हुई है। नकबजनी, अपहरण व आपसी सौहार्द बिगाडऩे की घटनाएं भी हुई, पुलिस ने अधिकांश मामलों की गुत्थी सुलझाई है। पुलिस के लिए इसमें मुखबिर के बजाय आधुनिक संसाधन मददगार बने। कॉल डिटेल, लोकेशन ट्रेस ने पुलिस को अहम सफलता दिलाई है।


आंतरिक मुखबिरी भी हो गई सुस्त

बदलते दौर के साथ पुलिस की जांच व्यवस्था में बदलाव से पुलिस की आतंरिक मुखबिरी भी सुस्त हो गई है। हर थाने में दो-तीन पुलिसकर्मी सादी वर्दी में इलाके की गतिविधियों पर ध्यान रखते हैं। थाने के लिए यह आंतरिक मुखबिर कहलाते है। लेकिन यह पुलिसकर्मी भी आधुनिक तंत्र के बाद सुस्त हो गए है।


इसलिए भी हो रहा एेसा

किसी जमाने पर संगीन वारदात खोलने में मुखबिरों का अहम योगदान होता था। तब पुलिस तंत्र सजग नहीं था। एेसे में मुखबिरों की तूती बोलती थी। मुखबिरी के बदले उनको पुलिसकर्मी मेहताना देते। उनको सुरक्षा उपलब्ध करवाई जाती थी, लेकिन मुखबिरों के किन्नारा करने के पीछे बड़ा कारण उनको काम का मेहनताना देना पुलिस अधिकारी उचित समझते ही नहीं। वहीं थाने पर मुखबिरों की मुखबिरी होने का खतरा रहता है। इन हालातों में वह साथ छोड़ रहे है।
इनका कहना है

पुलिस की जांच व्यवस्था आधुनिक हुई है। वैज्ञानित तरीकों पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। डिजीटल तकनीक से अनुसंधान में काफी मदद मिल रही है।

- पारस जैन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक

सुभाषनगर थाना पुलिस ने नकबजन गिरोह की गैंग पकड़ी। सौ से अधिक वारदातों को खुलासा। पुलिस ने गैंग को पकडऩे के लिए वैज्ञानिक तरीके का लिया सहारा। मामले में मुखबिर काम नहीं आए।


कोतवाली थाना पुलिस ने एटीएम में कैश भरने वाले कम्पनी के प्रतिनिधियों से लाखों रुपए से भरा बैग छीनने के मामले में गिरोह का भण्डाफोड़ किया। यह गिरोह में आधुनिक तंत्र के सहारे ही पुलिस के हाथ आया।

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