मुमुक्षु प्रियंका खाब्या ने रविवार दोपहर हजारों श्रावक-श्राविकाओं की मौजूदगी में सांसारिक जीवन का त्याग कर संयम पथ अंगीकार किया
भीलवाड़ा।
बिजयनगर निवासी मुमुक्षु प्रियंका खाब्या ने रविवार दोपहर हजारों श्रावक-श्राविकाओं की मौजूदगी में सांसारिक जीवन का त्याग कर संयम पथ अंगीकार किया। युवाचार्य महेंद्र ऋषि ने जैसे ही मुमुक्षु प्रियंका को जैन भागवती दीक्षा मंत्र के साथ चरवला प्रदान करते ही वह अंतरमन से धर्मसभा में झूम उठी। सांसारिक चोला छोडऩे के पहले मुमुक्षु ने अपने भाई गौरवकुमार खाब्या को पास बुलाकर धर्मसभा को संबोधित करते हुए मिच्छामि दुक्कड़म किया तो भाई गौरव सहित श्रावक-श्राविकाओं की आंखें भर आई। केश लोचन के बाद मुमुक्ष प्रियंका ने साध्वी वेश धारण किया। विजय मुहूर्त में युवाचार्य ने मुमुक्षु को साध्वी रूप में परमेष्ठी वंदना का नाम दिया। इसी दौरान धर्मसभा में साध्वी विश्व वंदना की 13वीं दीक्षा जयंती मनाई गई। साध्वी की बड़ी दीक्षा 24 फरवरी को महावीर भवन में होगी।
तीन दिवसीय समारोह का आयोजन श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ कांचीपुरम द्वारा कांचीपुरम में किया गया था। सुबह मुमुक्षु के प्रतिक्रमण के बाद विरडथाल, महाभिनिष्क्रमण और ध्वजारोहण हुआ। युवाचार्य महेंद्र ऋषि ने विधि विधान के साथ जैन भागवती दीक्षा ग्रहण कराकर मुमुक्षु का नामकरण परमेष्ठी वंदना किया। युवाचार्य के आदेश पर साध्वियां परमेष्ठी वंदना को अपनी गोद में उठाकर मंच के ऊपर ले गई और अपने पास बिठाकर नए जीवन की शुरूआत कराई।
दीक्षा समारोह में युवाचार्य ने कहा कि पुण्यशाली आत्मा ही संयम जीवन अंगीकार करती है। सांसारिक जीवन से ज्यादा बेहतर साधु जीवन है। उप प्रवर्तक अक्षयऋषि, रितेश मुनि, हरीश मुनि, हितेंद्र मुनि, तेल तप आराधिका साध्वी चंदनबाला, जिनशासन प्रभाविका साध्वी पद्मावती, साध्वी रमीला कंवर सहित श्रीसंतों व साध्वियों के प्रवचन लाभ धर्म सभा को मिला। दीक्षा समापन पर साध्वी परमेष्ठी वंदना को श्री संघों द्वारा अक्षत से वधाया और उपकरण भेंट किए गए। दीक्षा महोत्सव का लाभ सांसारिक भाई गौरवकुमार एवं धर्म के माता-पिता सुरेंद्र सुराणा व लीला देवी सुराणा सहित सुराणा परिवार ने लिया। समारोह में मुमुक्षु के 11 परिजन का बहुमान लाभार्थी परिवार, श्री आदिनाथ महिला मंडल कांचीपुरम की सदस्याओं ने किया। इस अवसर पर शहर सहित जिले के विभिन्न श्री संघो सहित जैन समाज के सैंकड़ों श्रावक-श्राविकाएं मौजूद थे।