
भीलवाड़ा. प्रदेश में पंचायत चुनावों और सरकारी स्कूलों की अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। 3 अक्टूबर से और 16 नवंबर तक में पंचायत चुनावों के कारण शिक्षा विभाग का परीक्षा कार्यक्रम और शिक्षकों की दीपावली की छुट्टियां खटाई में पड़ती नजर आ रही हैं। इस दोहरे संकट से प्रदेश भर के शिक्षक असमंजस में हैं कि वे चुनाव करवाएंगे या परीक्षाएं संपन्न कराएंगे।
शिक्षा विभाग की ओर से प्रदेश भर में 15 से 29 अक्टूबर तक अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं प्रस्तावित हैं। वहीं, स्कूलों में 4 से 15 नवंबर तक दीपावली का अवकाश निर्धारित है। दूसरी ओर पंचायत चुनावों की शनिवार को घोषणा हो चुकी है। ये चुनाव 4 चरणों में होंगे। चुनाव की इन तिथियों के चलते शिक्षकों को चुनाव ड्यूटी के साथ अनिवार्य प्रशिक्षण में भी शामिल होना पड़ेगा। इससे स्कूलों में अर्द्धवार्षिक परीक्षा की व्यवस्थाएं प्रभावित हो जाएंगी। इसके अलावा 3 अक्टूबर से 16 नवंबर तक चुनाव हो रहे हैं। ऐसे में शिक्षकों के दीपावली अवकाश पर भी संकट खड़ा हो जाएगा।
इस मसले पर अधिकारियों ने फिलहाल कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है, लेकिन शिक्षक संगठनों ने चिंता जाहिर करते हुए विभाग और राज्य निर्वाचन विभाग को पत्र लिखा है। चुनाव व परीक्षा एक साथ होने से शिक्षकों को भारी परेशानी आएगी। इस मुद्दे पर शिक्षक नेता नीरज शर्मा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चुनाव आयोग और शिक्षा विभाग को आपसी सामंजस्य के साथ तिथियों का निर्धारण करना चाहिए था। शिक्षकों पर पहले से ही गैर-शैक्षणिक कार्यों का भारी दबाव है।
राजस्थान में पंचायती राज चुनाव का कार्यक्रम घोषित हो गया है। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, प्रदेश में चार चरणों में 41 जिला परिषदों, 457 पंचायत समितियों और 14,403 ग्राम पंचायतों के चुनाव होंगे। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए मतदान 23 अक्टूबर, 29 अक्टूबर, 4 नवंबर और 14 नवंबर को होगा। वहीं, पंच और सरपंच पदों के लिए 25 अक्टूबर, 31 अक्टूबर, 6 नवंबर और 16 नवंबर को वोट डाले जाएंगे। मतदान सुबह 7 से शाम 6 बजे तक होगा। पंच-सरपंच के वोटों की गिनती मतदान के दिन ही होगी, जबकि जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों की मतगणना 20 नवंबर को होगी। जिला प्रमुख और प्रधान के चुनाव 25 से 28 नवंबर तक कराए जाएंगे।