
भीलवाड़ा।
हर घर में रामायण होनी चाहिए। रामायण घर को स्वर्ग बना सकती है। बशर्ते हम इसको जीवन में अपना लें। दशहरा पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है। रावण महाज्ञानी था, लेकिन अहंकार के चलते राम के हाथों मरना पड़ा। जो भी व्यक्ति अहंकार करता है उसकी पराजयनिश्चित है।
ये विचार जैन संत प्रियदर्शन ने शुक्रवार को प्र्रज्ञा भवन में आयोजित धर्मसभा में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि मंथरा की संगत ने कैकयी को खराब बना दिया। विभीषण की तरह सच्चाई का साथ देना चाहिए, झूठ अन्याय को छोड़कर विभीषण ने अपने भाई का त्याग कर राम का साथ दिया। राम की तरह आज्ञाकारी पुत्र बनना चाहिए। धर्म सभा में वल्लभ मुनि की पुण्यतिथि के अवसर पर तीन दिवसीय आयोजन के तहत संजोड़े जाप किए। धर्मसभा को सौम्य दर्शन मुनि व विराट दर्शन ने भी सम्बोधित किया।
मन रूपी रावण को जलाने की जरूरत
सौभाग्य मुनि ने कहा कि अपने अंदर बैठे रावण को जलाने पर ही दशहरा मनाना सार्थक होगा। राग-द्वेष, मोह, माया, छल-कपट व अंहकार रूपी रावण को खत्म करने की आवश्यकता है। जीवन मे अच्छाइयों कि कमी नहीं है। हमें सिर्फ बुराई देखने की आदत पड़ी है। हर वर्ष देश में दशहरे पर रावण के पुतले का दहन किया जाता है, जबकि मन रूपी रावण को समाप्त करने की जरूरत है। बुराई तो सत्ययुग में भी थी। राम के घर के अंदर भी मंथरा थी। कलयुग और सतयुग को आत्मा की नजरों से ढूंढना होगा। अच्छा देखोगे तो अच्छा नजर आएगा।
प्रवर्तक मदन मुनि ने कहा कि जब तक आत्मा में पाप का आचरण रहेगा, तब तक कोई लाभ मिलने वाला नहीं है। चाहे गृहस्थ हो या साधु-साध्वी, जीवन का उदय नहीं हो सकता। ऑल इंडिया श्वेताम्बर स्थाकवासी जैन कॉन्फ्रेंस महिला शाखा की राष्ट्रीय अध्यक्ष रुचिराज सुराणा ने कहा कि आज भी नारी, मां, पत्नी, बेटी होती है। नारी जग जाए तो काली बन सकती है। शांतिभवन भवन के मंत्री नवरतनमल संचेती, कंवरलाल सूरिया, सरिता पोखरणा ने सुराणा का स्वागत किया।