भीलवाड़ा

World Population Day: जनसंख्या दिवस पर भीलवाड़ा की हकीकत…आबादी तो बढ़ी, लेकिन पानी का संकट अभी भी जस का तस

Bhilwara Population: भीलवाड़ा में जनसंख्या के आंकड़े में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। साल 2024 में जिले की कुल आबादी करीब 21.5 लाख रह गई थी, लेकिन इस साल यह आंकड़ा 30 लाख को पार कर गया। यह बड़ा उलटफेर शाहपुरा जिले के गठन और फिर उसके समाप्त हो जाने के कारण हुआ।

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Jul 11, 2025
Bhilwara Population (Patrika Photo)

Bhilwara Population: भीलवाड़ा जिले में साल 2024 में कुल आबादी 21 लाख रही। लेकिन इस साल जिले की आबादी 30 लाख हो गई। यह चौंकाने वाला आंकड़ा इसलिए सामने आया है कि साल 2024 में शाहपुरा, भीलवाड़ा से टूटकर नया जिला बना था और 17 महीने बाद ही यह जिला समाप्त हो गया।


बता दें कि सांख्यिकी एवं आर्थिक विभाग के आंकडों के अनुसार, जिले की आबादी तीस लाख को पार कर गई है। 7 अगस्त 2023 को शाहपुरा, कोटड़ी, जहाजपुर समेत पांच उपखंड के टूटकर नया शाहपुरा जिला बनने से भीलवाड़ा जिले की आबादी का ग्राफ लुढ़ककर साढ़े 21 लाख पर आ गया था। लेकिने 17 महीने उपरांत ही शाहपुरा जिले का दर्जा समाप्त होने से फिर से जिले का हिस्सा बना दिया। इससे भीलवाड़ा जिला फिर आर्थिक रूप से मजबूत होने के साथ ही विकास की राह पर चल पड़ा।

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80 हजार की आबादी ब्यावर के खाते में


जिला सांख्यिकी एवं आर्थिक विभाग की सहायक निदेशक डॉ. सोनल राज कोठारी ने बताया कि भीलवाड़ा जिले की अनुमानित आबादी तीस लाख से अधिक है। नए कैलेंडर में भौगोलिक, प्रशासनिक, राजस्व, पर्यटन, धार्मिक, नदी, तालाब, पुरा सपदा के साथ उपखंड, तहसील, पंचायत समिति मुख्यालयों की जानकारी का समावेश है। शाहपुरा फिर से भीलवाड़ा का हिस्सा है। जबकि बदनोर उपखंड मुयालय भीलवाड़ा से पृथक होकर ब्यावर जिले का हिस्सा बन चुका है। उपखंड क्षेत्र की कुल आबादी अभी अस्सी हजार है।


जिला अभी भी प्यासा


जिले में बढ़ती आबादी के साथ ही पेयजल संकट की स्थिति बरकरार है। जिले में साल 2013 से चंबल पेयजल परियोजना पर काम हो रहा है, लेकिन भीलवाड़ा शहर की 30 फीसदी आबादी को चंबल का पानी नहीं मिल सका है। इनमें पचास से अधिक निजी कॉलोनियां शामिल हैं।


नई कॉलोनियों का अस्तित्व


शहर में साल 2011 की आबादी करीब साढ़े तीन लाख थी। साल 2000 शहर में कॉलोनियों की संख्या करीब 35 थी, लेकिन साल 2025 में शहर की आबादी करीब पांच लाख और कॉलोनियों की संख्या करीब 150 हो गई।


मिनी इंडिया के रूप में पहचान

औद्योगिक विकास के कारण यहां यूपी, बिहार, बंगाल, दिल्ली, एमपी, पंजाब, झारखंड, महाराष्ट्र और गुजरात समेत देश के विभिन्न हिस्सों से लोग बसे हुए हैं। नगर नियोजन नहीं होने से आंतरिक ढांचा सुदृढ़ नहीं हो सका। जयपुर हाइवे की सड़क छह लेन में तब्दील हुई है।


पांच लाख की आबादी


जिले की आबादी तीस लाख के पार हो चुकी है। वहीं, भीलवाड़ा शहर की भी आबादी पांच लाख को पार कर चुकी है। इसलिए भीलवाड़ा को नगर निगम की सौगात मिल गई। शाहपुरा जिला भले ही समाप्त हो गया, लेकिन शाहपुरा नगर परिषद की सौगात आज भी कायम है।


शहर 15 किमी दूर तक फैला


जिले में पिछले एक दशक में करीब साढ़े छह लाख की आबादी बढ़ी है। शहर की जनसंख्या में भी करीब डेढ़ लाख का इजाफा हुआ है। डेढ़ दशक पूर्व तक शहर पांच किलोमीटर के दायरे में ही था, लेकिन अब यह दायरा पन्द्रह किलोमीटर दूरी तक फैल गया है। मांडल, शाहपुरा व सहाड़ा विधानसभा क्षेत्र के गांव भीलवाड़ा शहरी क्षेत्र में आ रहे हैं।

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Published on:
11 Jul 2025 12:55 pm
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