भारतीय संस्कृति में हाथ जोड़कर नमस्ते से अभिवादन करने की परंपरा रही है।
भीलवाड़ा .
कोरोना वायरस के कारण योग ने दिनचर्या काफी हद तक बदल गई है। जीवनशैली में हो रहे इन बदलावों को हर दिन अनुभव किया जा रहा है। इतिहास की कई बड़ी आपदाओं के बाद सामाजिक, आर्थिक और जीवनशैली में बदलाव देखे गए हैं। कोरोना संकट के दौर में सामाजिक जीवन काफी हद तक प्रभावित हो रहा है। खानपान और तौर-तरीकों से लेकर कार्यशैली बदल रही है। हो सकता है कि हमारी बदली आदतें जीवन का स्थाई हिस्सा बन जाए।
भारतीय संस्कृति में हाथ जोड़कर नमस्ते से अभिवादन करने की परंपरा रही है। कोरोना महामारी जब फैली तो स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने हाथ मिलाने की आदत से परहेज करने की सलाह दी। क्योंकि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को होने वाली इस बीमारी में हाथों के माध्यम से संक्रमण फैलने का सबसे ज्यादा खतरा रहता है। इसके चलते दुनिया ने हाथ मिलाने की जगह नमस्ते करने की भारतीय संस्कृति अपना ली है। साफ-सफाई पर जोर देते हुए हाथ धुलाना जरूरी किया। वर्क फ्रॉम होम संस्कृति लागू हुई। कोरोना के कारण पहनावे और रहन-सहन में बड़ा बदलाव हुआ है। वही लोगों का होटल या रेस्त्रां जाना बंद होने से घरों में ही लोग तरह-तरह के व्यजन बनाने में लगे रहे।
योग ने बदल दी जीवन शैली
कोरोना के चलते कई लोगों ने योग को अपनाया है। इसके कारण जीवन शैली तक बदली। लोगों ने वेबिनार के माध्मय से योग किया। महात्मा गांधी चिकित्सालय में कार्यरत उमा शंकर शर्मा ने कोरोना के मरीजो को १४-14 दिन योग करवाया गया। इससे कोरोना की जांच में परिवर्तन देखा गया है। कुछ मरीजो के 97 से 99 प्रतिशत तक असर देखने को मिला। रोजना 45 मिनट योग अभ्यास करवाया गया। विगत 4 वर्षो से भीलवाड़ा में प्रात काल शिवाजी उद्यान में नि:शुल्क योग अभ्यास कराया जा रहा है। इसमें अब तक 28 हजार 493 लोगो को लाभान्वित किया है 166 योग शिविर के माध्यम से 7829 लोगों को लाभान्वित किया है। चिकित्सालय में आने वाले विगत 4 वर्षों में ओपीडी योग शिविर निशुल्क योगाभ्यास से 61 हजार 335 लोगों को लाभान्वित किया है। शर्मा ने बताया कि कोरोना काल में योग और आयुर्वेद दो ऐसे सूत्र बने हैं, जो ढांढस बढ़ाते हैं। शरीर की रक्षा योग के माध्यम से होती रही है। उसके पीछे भारतीय दार्शनिक दृष्टिकोण है। आयुर्वेद जीवन में जीने की दृष्टि है।