भिंड

सरकारी कार्यक्रम में नहीं पहुंच सके मंत्रीजी तो अफसरों ने उनके बेटे को ही बना डाला ‘मंत्री’, अब हो रही फजीहत

Protocol Violation In MP : एमपी के अधिकारियों ने हालही में सरकारी कार्यक्रम के दौरान एक ऐसा कारनामा कर दिया, जिसके बाद से एक बार फिर सरकारी सिस्टम की किरकिरी होने लगी है।
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Mar 25, 2026
Protocol Violation In MP
अधिकारियों का अजब कारनामा (Photo Source- Alok Rakesh Shukla FB)

Protocol Violation In MP : कहते हैं… सरकारी सिस्टम में रहकर अजब-गजब कारनामें करने का हुनर तो कोई मध्य प्रदेश के अफसरों से सीखे। ये बात यहां एक बार फिर कल से लोगों के बीच खासा चर्चा में है। बता दें कि, एमपी के अधिकारियों ने हालही में सरकारी कार्यक्रम के दौरान एक ऐसा कारनामा कर दिया, जिसके बाद से सरकारी सिस्टम की किरकिरी होने लगी है। दरअसल, भिंड जिले के मेहगांव में 'संकल्प से समाधान' नाम से जनसमस्या निवारण शिविर आयोजित किया गया था। इसी कार्यक्रम में प्रशासनिक लापरवाही और प्रोटोकॉल उल्लंघन करने का मामला सामने आया है।

सरकारी कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री राकेश शुक्ला को मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होना था, लेकिन किन्ही अन्य व्यस्तताओं के कारण मंत्रीजी कार्यक्रम में अनुपस्थित रहे। ऐसे में कार्यक्रम की जिम्मेदारी निभाने वाले अफसरों ने नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए मंत्री राकेश शुक्ला के बेटे आलोक शुक्ला को ही कार्यक्रम का मुख्य अतिथि बना डाला। यही नहीं, इस दौरान मंत्री के बेटे को भी मंत्री लेविल का पूरा प्रोटोकाल तो दिया ही गया, साथ ही हितग्राहियों को योजनाओं के प्रमाण पत्र तक वितरित करा दिए। अब इस पूरे कार्यक्रम से जुड़ी तस्वीरें सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों की खासा किरकिरी होने लगी है। उनके इस कारनामे का विरोध भी शुरु हो गया है।

अधिकारियों ने नियम ही ताक पर रख दिया

अधिकारियों का अजब कारनामा (Photo Source- Alok Rakesh Shukla FB)

बताया जा रहा है कि, सोमवार को जिले के मेहगांव में 'संकल्प से समाधान' अभियान के तहत जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन हुआ था। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में स्थानीय विधायक और कैबिनेट मंत्री राकेश शुक्ला को शामिल होना था। लेकिन, किसी कारण से मंत्री शुक्ला कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। अब नियम और प्रोटोकॉल के अनुसार, ऐसी स्थिति में कार्यक्रम की जिम्मेदारी किसी अन्य जनप्रतिनिधि या वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को सौंपी जानी थी, लेकिन यहां अधिकारियों द्वारा जो रास्ता अपनाया गया, वो पहले किसी सरकारी कार्यक्रम में नहीं देखा गया।

मंत्री के बेटे हैं तो बना दिया मुख्य अतिथि

अधिकारियों का अजब कारनामा (Photo Source- Alok Rakesh Shukla FB)

कार्यक्रम में मंत्री के न पहुंचने पर अधिकारियों ने उनके बेटे आलोक शुक्ला को ही मंच पर बुला लिया और उनसे ही प्रमाण पत्र वितरित करा दिए। मंच से उन्होंने विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाण पत्र और लाभ वितरित किए। अधिकारियों की मनमानी यहीं नहीं रुकी, जनसंपर्क अधिकारी पुष्पराज सिंह द्वारा जारी प्रेस नोट में आलोक शुक्ला को ही 'जनप्रतिनिधि' तक बता दिया। ऐसा करने से इस विवादित घटनाक्रम ने और तूल पकड़ लिया।

नियम के तहत बड़ी गलती

अधिकारियों का अजब कारनामा (Photo Source- Alok Rakesh Shukla FB)

विपक्षी पार्टी को मामले को लेकर हमलावर हो गई। उनका कहना है कि, जनप्रतिनिधि वो होता है जिसे जनता द्वारा चुना गया हो, जैसे मंत्री, सांसद, विधायक या निर्वाचित निकाय प्रतिनिधि समेत अन्य। आलोक शुक्ला ने अब तक कोई चुनाव ही नहीं लड़ा और न ही उनके पास कोई संवैधानिक या प्रशासनिक पद है। ऐसे में उन्हें 'जनप्रतिनिधि' बताना नियमों के तहत अधिकारियों की बड़ी गलती है।

क्या कहता है सरकारी प्रोटोकॉल ?

अधिकारियों का अजब कारनामा (Photo Source- Alok Rakesh Shukla FB)

सरकारी कार्यक्रमों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश होते हैं। मंच से वितरण कार्य सिर्फ अधिकृत जनप्रतिनिधि या सरकारी अधिकारी ही करने का दायित्व रखते हैं। मंत्री की अनुपस्थिति में ये जिम्मेदारी किसी अन्य अधिकृत अधिकारी या अन्य जनप्रतिनिधि को सौंपी जानी होती है। किसी निजी व्यक्ति या परिजन से मंच पर सरकारी कार्य कराना प्रोटोकॉल का कड़ा उल्लंघन माना जाता है। हालियां मामले में इन सभी नियमों को नजरअंदाज कर प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया गया है।

Updated on:
25 Mar 2026 07:39 am
Published on:
25 Mar 2026 07:39 am