
भिवाड़ी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 फरवरी को पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की घोषणा की। भिवाड़ी में यह योजना इतनी पसंद आ रही है कि विद्युत निगम कार्यालय में रोजाना सैकड़ों घरेलू उपभोक्ता इस संबंध में जानकारी करने पहुंच रहे हैं। आवेदन की प्रक्रिया और मिलने वाले लाभ के बारे में जान रहे हैं। आवेदनों की संख्या तो अभी 37 तक ही पहुंची है लेकिन निगम अभियंताओं को उम्मीद है कि जिस हिसाब से जानकारी करने वाले उपभोक्ता पहुंच रहे हैं, अगर वे सभी आवेदन करते हैं तो जल्द ही आंकड़ा दो से तीन हजार तक पहुंच सकता है।
सहायक अभियंता कार्यालय में 30 हजार घरेलू उपभोक्ता हैं। जिनके द्वारा प्रति महीने 90 लाख यूनिट बिजली की खपत की जाती है। अगर दस फीसदी (तीन हजार) उपभोक्ता सोलर ऊर्जा संयंत्र लगाते हैं तो 12 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन हो सकेगा। एक किलोवाट का सिस्टम एक दिन में चार यूनिट बिजली का उत्पादन करेगा, तीन किलोवाट का 12 यूनिट ऊर्जा देगा। इस तरह महीने में यह आंकड़ा 12 लाख तक पहुंच जाएगा।
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करीब दो साल में पैसा वसूल
तीन किलोवाट के सोलर पैनल की लागत करीब 1.40 लाख रुपए है। सरकार 78 हजार की सब्सिडी देगी। 62 हजार रुपए उपभोक्ता का हिस्सा होगा। तीन किलोवाट सौर पैनल से रोजाना 12 यूनिट बिजली उत्पादन होगा। अगर उपभोक्ता निगम से एक यूनिट बिजली लेता है तो उसका आठ रुपए देना पड़ता है। इस तरह 22 महीने में उसके 62 हजार रुपए वसूल हो जाएंगे।
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खपत आपकी, अतिरिक्त सरकार की
सौर पैनल लगाने के बाद उपभोक्ता की जितनी खपत होगी, उसके बाद जो बिजली अतिरिक्त बचेगी, वह नेट मीटरिंग के तहत निगम लेगा। अगर उपभोक्ता की औसत खपत सौ यूनिट है और उसके पैनल से तीन सौ यूनिट बिजली उत्पादित हो रही है तो शेष दो सौ यूनिट बिजली को निगम लेगा। उपभोक्ता पहले जो सौ यूनिट का 800 रुपए सरकार को देता था उसकी बचत होगी।
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अभी तक यह है स्थिति
औद्योगिक क्षेत्र में प्रति महीने औसतन 24 करोड़ यूनिट बिजली की खपत होती है। अभी तक करीब दो प्रतिशत बिजली सौर ऊर्जा से प्राप्त होती है। 177 इकाइयों ने सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए हैं। औद्योगिक इकाइयों में अभी तक 45175 किलोवाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र लग चुके हैं। सोलर प्लांट से एक महीने में औसत 42.63 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन हो रहा है। जिन इकाइयों के पास अतिरिक्त बिजली का उत्पादन होता है वे नेट मीटरिंग से बिजली बोर्ड को तीन लाख यूनिट बिजली प्रति महीने देती हैं। अतिरिक्त बिजली के उत्पादन से इकाई 22.56 लाख रुपए का राजस्व प्राप्त करती हैं। जबकि 39.27 लाख यूनिट बिजली का स्वयं उपयोग कर 2.95 करोड़ रुपए की बचत करती हैं। क्योंकि अगर इतनी बिजली निगम से खरीदकर उपयोग करते तो इसका अधिक दर से भुगतान करना पड़ता।
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वाहन निर्माता कंपनी में बड़ा प्लांट
औद्योगिक क्षेत्र की कई इकाइयों ने बड़े स्तर के प्लांट लगवाए हैं। एक वाहन निर्माता कंपनी में 5900 केवीए का सोलर प्लांट लगा है। इसके साथ ही अन्य दर्जनों इकाइयों में भी बड़े सौर ऊर्जा संयंत्र लगे हैं। इसके साथ ही छोटी इकाइयों में भी कम क्षमता के सिस्टम लगाए गए हैं। सौर ऊर्जा की मदद से एक तरफ हरित ऊर्जा का सही उपयोग हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ निगम की आपूर्ति बाधित होने पर भी इकाई परिसर में निर्बाध काम चलता रहता है।
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योजना का खूब प्रचार प्रसार किया जा रहा है। फीडर इंचार्ज को निर्देश दिए गए हैं कि आम उपभोक्ताओं को पंपलेट बांटकर एवं योजना का फायदा समझाकर एवं ऐप डाउनलोड कराकर पंजीयन करा रहे हैं।
एससी महावर, एक्सईएन, विद्युत निगम