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Bhiwadi news : आवासीय सोसायटी से लेकर अधूरे फ्लैट एक दशक में हो गए जर्जर

उद्योग नगरी भिवाड़ी की बसावट भले ही 70 के दशक में हुई हो लेकिन यहां भी कई इमारतें ऐसी हैं जो कि अब जर्जर हो चुकी हैं, जिनका निर्माण भी एक से दो दशक के बीच में हुआ है। मानसून में बारिश के दौरान के ढहने का खतरा बरकरार रहता है, जिससे जान माल के नुकसान की आशंका रहती है।

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भिवाड़ी

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Dharmendra dixit

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Dharmendra Dixit

Jun 10, 2026

bhiwadi news

एक जगह होगा रखरखाव, दूसरी जगह होंगे धराशायी

भिवाड़ी. उद्योग नगरी भिवाड़ी की बसावट भले ही 70 के दशक में हुई हो लेकिन यहां भी कई इमारतें ऐसी हैं जो कि अब जर्जर हो चुकी हैं, जिनका निर्माण भी एक से दो दशक के बीच में हुआ है। मानसून में बारिश के दौरान के ढहने का खतरा बरकरार रहता है, जिससे जान माल के नुकसान की आशंका रहती है। यूआईटी सेक्टर तीन में ईडब्ल्यूएस श्रेणी के 224 अधूरे निर्मित फ्लैट हों या फिर बस स्टैंड के पास राजीव गांधी एंकलेव और पटवार घर सभी की जर्जर स्थिति है। बस स्टैंड परिसर स्थित पटवार घर में पहले हल्का पटवारी एवं स्टाफ बैठते थे लेकिन अब जर्जर होने की वजह से भवन बंद पड़ा है। इसके पास से ही बड़ा नाला गुजरता है। बारिश में जलभराव होता है जिसकी वजह से कभी भी ढहने की आशंका है।

जर्जर हो चुके 224 अधूरे फ्लैट, 2009 में शुरू हुआ था निर्माण

ईडब्ल्यूएस श्रेणी के 224 अधूरे निॢमत फ्लैट को आईआईटी रुडक़ी और एमएनआईटी की रिपोर्ट के बाद ध्वस्त कर आवेदकों को मूल राशि नौ फीसदी ब्याज के साथ लौटाने का फैसला लिया गया। आवेदकों को नौ फीसदी ब्याज के साथ मूल राशि लौटाई गई है। आवेदकों ने 2009 में प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद करीब 91 लाख रुपए की राशि बीडा को जमा कराई थी। आईआईटी रुडक़ी की टीम ने नवंबर 2022 में यहां आकर मौजूदा संरचना की जांच की थी। आईआईटी रुडक़ी से आई टीम ने एग्जिस्टिंग स्टेबिलिटी (मौजूदा स्थिति) के सैंपल लिए थे। सैंपल लेने के बाद आईआईटी रुडक़ी की टीम ने मौजूद निर्माण को सुरक्षा और मजबूती के मानकों पर परखा और रिपोर्ट बीडा को भेज दी है। रिपोर्ट के अनुसार उक्त संरचना में नव निर्माण नहीं हो सकता। एक ब्लॉक में साढ़े तीन मंजिल, दूसरे ब्लॉक में ढाई मंजिल, एक ब्लॉक में डेढ़ मंजिल और दो ब्लॉक में नींव का काम पूरा होने के बाद निर्माण एजेंसी काम छोडक़र भाग गई। तब से लेकर अब तक यह ढ़ाचा ऐसे ही खड़ा हुआ था। निर्माण साइट से पोल में लगे सरिया और अन्य सामान भी चोरी हो गया।

राजीव गांधी एंकलेव जर्जर स्थिति, तकनीकि विशेषज्ञों से कराई जांच

बस स्टैंड स्थित राजीव गांधी आवास के जर्जर भवनों की जांच तकनीकि विशेषज्ञों से कराई गई है। निर्माण की स्थिति कैसी है, आवासीय परिसर में निर्माण संबंधी जो भी खामियां हैं, इसके संबंध में तकनीकि टीम ने जांच रिपोर्ट सौंपी है। जांच रिपोर्ट के बाद यहां साढ़े सात करोड़ से रखरखाव कार्य होगा। सोसायटी में कई जगह निर्माण की स्थिति बहुत खराब है, ऐसी स्थिति में यहां रहने वाले परिवारों को भय उत्पन्न होता है, इसके लिए बीडा ने तकनीकि जांच कराई है। एक बार एमएनआईटी की टीम भी मौके पर आकर फोटो और वीडियोग्राफी कर चुकी है। गत वर्ष जुलाई में झालावाड़ स्कूल हादसे के बाद सरकार ने प्रदेशभर के स्कूलों की रिपोर्ट ली थी, इसी आधार पर बीडा ने जर्जर आवासीय सोसायटी की जांच कराने का निर्णय लिया था। आवासीय सोसायटी में 120 परिवार एक साथ रहते हैं। घटिया निर्माण की वजह से हादसा हो सकता है। यूआईटी (बीडा) की ओर से निर्मित राजीव गांधी एंकलेव (हरिनाथ सोसायटी) आलमपुर बस स्टैंड की स्थिति भी जर्जर हो चुकी है। यूआईटी ने उक्त फ्लैट का निर्माण 2009 में शुरू कराया और 2017 में आवंटन किया। अभी आवंटियों को यहां निवास करते हुए नौ साल ही हुए हैं लेकिन फ्लैटों के निर्माण में लगाई गई घटिया निर्माण सामग्री का असर दिखने लगा है। फ्लैट देखने पर ऐसा लगता है मानों यह निर्माण कई दशक पुराना हो और अब खंडहर घोषित करने की तैयारी हो। सोसायटी में 160 फ्लैट हैं जिसमें 120 परिवार रहते हैं। यहां रहने वाले परिवार फ्लैट के अंदर रहने पर डरने लगे हैं। फ्लैट के अंदर स्लैब बीम फट चुका है। उसके ऊपर से प्लास्टर झड़ चुका है। सरिए गल चुके हैं। फ्लैट के अंदर और बाहर दीवार हों सभी जगह दुर्दशा दिखाई देती है। दीवारों के अंदर से सीमेंट निकल रहा है। सीलन से ऊपर से नीचे तक दीवार जर्जर हो रही हैं। बीम खराब होने और सरिया गलने से भय लगता है।