
अभी नीमराणा में चल रही चार ट्रेड की अस्थायी कक्षाएं
भिवाड़ी. काली खोली में प्रस्तावित पॉलिटेक्निक कॉलेज निर्माण का मामला फिलहाल लंबित है। कक्षाएं नीमराणा पॉलिटेक्निक कॉलेज में संचालित हो रही हैं। चार ट्रेड में 30-30 सीट हैं, जिसमें अभी 80 विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं। कॉलेज निर्माण का काम न्यायालय में मामला विचाराधीन होने से रुक गया है। विभाग ने निर्माण के लिए टेंडर लगाया, जिस फर्म को टेंडर दिया, उसे बाद में ब्लैक लिस्ट कर दिया गया। दोबारा निविदा निकाली गई, इसके बाद ब्लैक लिस्ट फर्म कोर्ट से जाकर स्थगन आदेश ले आई। अब मामला कोर्ट से निस्तारित होने के बाद ही कॉलेज निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, तब तक छात्रों को अस्थायी रूप से संचालित कॉलेज में ही अध्ययन करना पड़ेगा। इस मामले से पूर्व में विभाग ने जमीन का क्षेत्रफल बढ़ाने और बजट आवंटन अधिक कराने के लिए भी प्रयास किए थे लेकिन सफलता नहीं मिली। तकनीकि शिक्षा विभाग ने बीडा को कॉलेज निर्माण के लिए 16187 वर्गमीटर भूमि आवंटन का प्रस्ताव दिया था, जबकि बीडा ने साइट प्लान अनुसार 13 हजार वर्गमीटर भूमि आवंटित की है। वहीं कॉलेज निर्माण के लिए भी पूर्व में 16 करोड़ का बजट आवंटित था, जिसे संशोधित कराने के लिए वित्त विभाग को भेजा गया था। वित्त विभाग ने बजट को घटाकर 10 करोड़ कर दिया। इस तरह कॉलेज निर्माण के लिए भूमि की कमी और बजट में कटौती होने से मामला अटका था। तकनीकि शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार कॉलेज निर्माण के लिए 16187 वर्गमीटर भूमि की जरूरत है और कॉलेज निर्माण के लिए 20 करोड़ का बजट चाहिए। बीडा से अतिरिक्त भूमि की गई, इस संबंध में प्रक्रिया की गई। वहीं बजट बढ़ाने के लिए भी वित्त विभाग को प्रस्ताव दोबारा भेजा गया। इसके बाद बजट नहीं बढ़ा और भूमि का क्षेत्रफल भी उतना ही रहा, विभाग ने टेंडर लगाकर निर्माण शुरू कराया लेकिन अब निर्माण एजेंसी से विवाद की वजह से काम अटक गया।
बजट घोषणा के अनुसार कॉलेज निर्माण के लिए 16 करोड़ का बजट आवंटित किया गया था। जमीन काली खोली में निर्माणाधीन कन्या महाविद्यालय और प्रस्तावित कवेंशन सेंटर के पास चिन्हित हुई है। जमीन आवंटन से पहले वन विभाग को पर्यावरण प्रबंधन योजना बनाकर देनी थी। उक्त क्षेत्र में विशेषज्ञता रखने वाली फर्म से एनवायरमेंट इंपेक्ट स्टेटमेंट एंड एनवायरमेंट मैनेजमेंट प्लान फॉर गर्वनमेंट पॉलिटेक्निक कॉलेज तैयार कराया है। जिससे उक्त क्षेत्र में भविष्य में किस जमीन का किस तरह उपयोग होगा, इसका भी निर्धारण हो सकेगा। साथ ही निर्माण के दौरान किस तरह के नियमों का पालन करना है इसका भी ध्यान रखना होगा।
उक्त प्रोजेक्ट से पहले पर्यावरण संबंधी प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनने के बाद पॉलिटेक्निक कॉलेज को जमीन आवंटन किया गया। कवेंशन सेंटर के लिए भी इसका उपयोग हो सकेगा। भविष्य के अन्य प्रोजेक्ट में भी इस पर्यावरण रिपोर्ट को काम लिया जा सकेगा।
टेंडर होने के बाद निर्माण एजेंसी ब्लैकलिस्ट हो गई, दोबारा निविदा होने पर फर्म कोर्ट चली गई, अभी मामला कोर्ट में लंबित है, जिसकी वजह से निर्माण प्रक्रिया शुरू नहीं हुई।
नितिन मेहरा, नोडल अधिकारी, तकनीकि शिक्षा विभाग
Updated on:
08 Jun 2026 06:22 pm
Published on:
08 Jun 2026 06:22 pm
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