भोपाल

सीखो-कमाओ योजना में 4.47 लाख लोगों ने कराया रजिस्ट्रेशन, एमपी में मिल रहा ‘8 हजार’ स्टाइफंड

Sikho Kamao Yojana: मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना में चयन प्रक्रिया में देरी और सात दिन में अनुबंध स्वीकृति न करने पर प्रस्ताव निरस्त होने से युवाओं की रोजगार संबंधी उम्मीदें अधूरी रह गई हैं।
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Oct 05, 2026
नौकरी के लिए लाइन में खड़े युवा, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source: AI Image)
नौकरी के लिए लाइन में खड़े युवा, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source: AI Image)

Bhopal news: प्रशिक्षण के साथ रोजगार का मौका देने के उद्देश्य से शुरू की गई मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना में पंजीयन कराने वाले युवाओं की उम्मीद और जमीनी हकीकत में अंतर सामने आ रहा है। मध्यप्रदेश में अब तक 4.47 लाख अभ्यर्थियों ने पंजीयन कराया है, लेकिन इनमें से कई युवाओं को पंजीयन के बाद संबंधित कंपनियों से कोई जवाब नहीं मिला। कुछ युवा जब खुद कंपनी तक पहुंचे तो उन्हें उनकी शैक्षणिक योग्यता से कम स्तर का काम सौंप दिया गया।

युवक के मुताबिक, पंजीयन के दौरान उसे फैक्ट्री में प्रशिक्षण और काम मिलने की उम्मीद थी। जब वह संबंधित स्थान पर पहुंचा तो वहां गिट्टी बनाने का काम था। इस काम के लिए 12वीं पास योग्यता बताई गई थी। उसने खुद के स्नातक होने की बात कहते हुए दूसरे काम के बारे में पूछा तो कंपनी की ओर से कहा गया कि फिलहाल यही काम है और पंजीयन हो चुका है तो कम से कम तीन महीने काम करना होगा। इसके बदले उसे प्रतिमाह 8 हजार रुपए मिल रहे हैं।

चयन प्रक्रिया लंबी हुई तो ऑफर भी अटके

योजना से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, बड़ी संख्या में युवाओं ने प्रशिक्षण के बाद रोजगार की उम्मीद में आवेदन किया है। कंपनियों को संबंधित पदों के लिए योग्य उम्मीदवारों का चयन इंटरव्यू और अन्य प्रक्रियाओं के जरिए करना होता है। चयन प्रक्रिया में समय लगने के कारण कई पदों के लिए कंपनियां अब तक अनुबंध प्रस्ताव जारी नहीं कर सकी हैं। ऐसे में पंजीयन कराने के बाद भी युवाओं को कंपनी की ओर से बुलावे का इंतजार करना पड़ रहा।

सात दिन में स्वीकृति नहीं तो अनुबंध निरस्त

योजना की प्रक्रिया में एक और पेंच सामने आया है। कंपनी की ओर से अनुबंध प्रस्ताव जारी होने के बाद अभ्यर्थी को सात दिन के भीतर उसे स्वीकृत करना होता है। तय अवधि में स्वीकृति नहीं मिलने पर अनुबंध स्वतः निरस्त हो जाता है। इस शर्त के चलते कई प्रस्ताव निरस्त हो चुके हैं। अब संबंधित कंपनियां दोबारा चयन प्रक्रिया शुरू कर रही हैं। इससे युवाओं का इंतजार और बढ़ गया है।

पंजीयन करते समय लगा था कि कंपनी में प्रशिक्षण मिलेगा और आगे नौकरी का रास्ता बनेगा। कंपनी की तरफ से कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिली। खुद संपर्क करने पर परिवहन से जुड़ा काम बताया गया। मेरी पढ़ाई जिस क्षेत्र में है, उससे काम का सीधा संबंध नहीं है। अमित शर्मा (परिवर्तित नाम), डिप्लोमा धारक

योजना में पंजीयन इसलिए कराया था कि प्रशिक्षण के बाद रोजगार का अवसर मिलेगा। कई बार कंपनी की जानकारी और चयन को लेकर इंतजार करना पड़ा। जब संपर्क किया तो प्रक्रिया चलने की बात कही गई। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि प्रशिक्षण के बाद स्थायी रोजगार का अवसर मिलेगा या नहीं। सोनू यादव (परिवर्तित नाम), स्नातक

Updated on:
05 Oct 2026 08:31 am
Published on:
05 Oct 2026 08:31 am