भोपाल

अब प्रशासन नहीं, सुप्रीम कोर्ट हटवाएगा भोपाल का कचरा, सख्त आदेश जारी

Supreme Court: आदमपुर में कचरा निस्तारण को लेकर मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने डंप साइट की स्थिति पर रिपोर्ट तलब की है, जबकि एनजीटी ने प्रशासन और निगम को जवाब देने के निर्देश दिए हैं।

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Feb 14, 2026
Adampur Waste Management Case (फोटो- Patrika.com)

MP News: कचरा प्रबंधन के मामले में आदमपुर (Adampur Waste) देश में नजीर बनेगा। सुप्रीम कोर्ट इस पर सीधी निगरानी करेगा। उच्चतम न्यायालय में मामला जाने के बाद एनजीटी ने सुनवाई के दौरान यह स्पष्टीकरण दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने 11 जनवरी को सुनवाई की थी। जिसमें केन्द्र सरकार से जवाब मांगा गया है। आदमपुर छावनी में वैज्ञानिक तरीके से कचरा निस्तारण न होने के कारण प्रदूषण और आगजनी के मामले में याचिकाकर्ता ने कोर्ट में पक्ष रखा।

बताया गया कि भूमि, जल और वायु में प्रदूषण बढ़ रहा है। गंभीर बीमारियां हो रही है। जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं हुई। इस पर ट्रिब्यूनल ने कहा यह मामला उच्चतम न्यायालय में है। नितिन सक्सेना की याचिका पर सुनवाई की गई है। राजधानी भोपाल में अपशिष्ट प्रबंधन और वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट को लेकर प्रकरण अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया है।

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सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई, भोपाल प्रशासन को दिए सख्त आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने 11 फरवरी को आदमपुर में कचरा प्रबंधन के मामले में सुनवाई की थी। यह अपील जुर्माने के खिलाफ थी। यह पर्यावरणविद सुभाष सी पांडे की याचिका के आधार पर रही। निगम के वकील ने सूचित किया कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 'नीरी' से डंप साइट की स्थिति पर रिपोर्ट मांगी है।

याचिका पर सुनवाई की गई है। राजधानी भोपाल में अपशिष्ट प्रबंधन और वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट को लेकर प्रकरण अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने 11 फरवरी को आदमपुर में कचरा प्रबंधन के मामले में सुनवाई की थी। यह अपील जुर्माने के खिलाफ थी। यह पर्यावरणविद सुभाष सी पांडे की याचिका के आधार पर रही। निगम के वकील ने सूचित किया कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 'नीरी' से डंप साइट की स्थिति पर रिपोर्ट मांगी है। मामला देश की शीर्ष अदालत में लंबित है, एनजीटी ने अगली सुनवाई 21 अप्रैल, 2026 तय की है। ट्रिब्यूनल ने भोपाल कलेक्टर और नगर निगम को निर्देश दिए है कि वे याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए बिंदुओं पर अगली तारीख से पहले अपना जवाब प्रस्तुत करें।

रातापानी में राख और धुंए के प्रदूषण पर पत्र

रातापानी अभयारण्य के बफर जोन में ईट भट्ठों के संचालन पर एनजीटी ने सख्ती दिखाई। इससे होने वाले धुएं और राख को पर्यावरण के लिए घातक बताया है। रायसेन कलेक्टर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, वन अधिकारी और रातापानी वन्यजीव अभयारण्य के आयुक्त को नोटिस करने के निर्देश दिए है। सरपंच के पत्र को याचिका मानते हुए ये सुनवाई की गई थी। मामले की अगली सुनवाई 15 अप्रैल को होगी। एनजीटी ने पर्यावरण का महत्वपूर्ण मुद्दा मानते हुए जांच समिति गठित करने के निर्देश दिए है। इसमें रायसेन कलेक्टर के प्रतिनिधि, डीएफओ (रायसेन) और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि शामिल होंगे। (MP News)

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Published on:
14 Feb 2026 05:16 am
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