
Bhopal AIIMS CBI Bribery Case: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के एम्स (AIIMS) में सीबीआई की रेड से हड़कंप मच गया। सीबीआई की टीम ने यहां से एक नर्सिंग ऑफिसर को पकड़ा है। नर्सिंग ऑफिसर के खिलाफ एम्स में भर्ती एक मरीज के परिजन ने रिश्वत मांगने की शिकायत सीबीआई में दर्ज कराई थी। नर्सिंग ऑफिसर पर आरोप है कि उसने मरीज के परिजन से ऑपरेशन में लगने वाले उपकरणों के एवज में 16500 रुपये की रिश्वत की मांग की थी। सीबीआई टीम ने जैसे ही एम्स में नर्सिंग ऑफिसर को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों पकड़ा तो वहां कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
शाजापुर जिले के रहने वाले विनोद मेवाड़ा ने सीबीआई में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि वो एक आयुष्मान कार्ड धारक है और भोपाल एम्स में उसकी मां का कमर का इलाज कराने के लिए आया था। एम्स में 21 जुलाई को मां का एक ऑपरेशन हुआ। इसके बाद डॉक्टरों ने एक और ऑपरेशन के लिए कहा। साथ ही यह भी बताया कि आयुष्मान योजना के अंतर्गत पूरा मुफ्त इलाज होगा। लेकिन इसी बीच 22 जुलाई को गिरधारी चौधरी नाम का व्यक्ति उसके पास वार्ड में आया और बोला कि ऑपरेशन के उपकरणों के लिए 16500 रुपये देने होंगे वरना दूसरा ऑपरेशन नहीं किया जाएगा। इसके बाद गिरधारी चौधरी उस पर पैसों के लिए दबाव बनाने लगा और बाद में 12000 रुपये देने की बात कही।
फरियादी विनोद मेवाड़ा के द्वारा सीबीआई को फोन रिकॉर्डिंग भी सबूत के तौर पर दी गई जिसमें रिश्वत की बात कैद थी। सीबीआई टीम ने शिकायत व फोन रिकॉर्डिंग की जांच की और सबकुछ सही पाए जाने पर आरोपी नर्सिंग ऑफिसर को रंगेहाथ पकड़ने के लिए ट्रैप दल बनाया। रिश्वत के 12000 रुपये लेकर फरियादी विनोद को आरोपी गिरधारी चौधरी के पास भेजा और जैसे ही नर्सिंग ऑफिसर गिरधारी चौधरी ने रिश्वत के रुपये लिए तो सीबीआई की टीम ने उसे रंगेहाथों पकड़ लिया।
बता दें कि इससे पहले भोपाल एम्स में रिश्वतखोरी का मामला सामने आया है। कुछ साल पहले एम्स के डिप्टी डायरेक्टर धीरेंद्र प्रताप सिंह को भी सीबीआई की टीम ने 1 लाख रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथों पकड़ा था। तब सामने आया था कि डिप्टी डायरेक्टर धीरेंद्र प्रताप सिंह ने 40 लाख रुपए के बिल पास कराने के लिए पांच प्रतिशत (दो लाख) रुपए रिश्वत के तौर पर मांगे थे और पहली किश्त के 1 लाख रुपये लेते हुए उन्हें सीबीआई की टीम ने रंगेहाथों पकड़ा था।