
Rajya Sabha Election MP- मध्यप्रदेश में चल हुए राज्यसभा चुनाव के घटनाक्रम के बाद देशभर के नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आ रही है। गुरुवार को थोड़ी देर पहले तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से AIMIM के चीफ एवं सांसद असुद्दीन ओवैसी ने कहा कि यदि आपके खलाफ कोई fir है तो उसकी जानकारी नामांकन फार्म में देना होती है। इसके अलावा आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने कांग्रेस से ही सवाल पूछ लिया। दोनों नेताओं की प्रतिक्रिया चर्चा का विषय बनी हुई है।
मध्यप्रदेश में तीन सीटों पर हुए राज्यसभा चुनाव में तीनों की सीटों पर भाजपा ने कब्जा जमा लिया। पहले दो सीटें भाजपा और एक सीट पर कांग्रेस का काबिज होना तय माना जा रहा था, लेकिन अंतिम दौर में भाजपा ने तीसरी सीट पर भी अपना उम्मीदवार उतार दिया। इसके बाद चले घटनाक्रम से सियासत में घमासान हो गया। कांग्रेस उम्मीदवार जिसे एक सीट मिलना तय था, वो भी हाथ से चले गए।
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन ही यह कहते हुए रद्द कर दिया कि उन्होंने fir की बात अपने फॉर्म में छिपाई है। गुरुवार को तोनों नेताओं को प्रमाण पत्र मिल गए हैं, अब वे राज्यसभा सांसद बन गए हैं। इधर, कांग्रेस ने धरना-प्रदर्शन से लेकर दिल्ली सुप्रीम कोर्ट तक दौड़ लगा दी है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस के वकील अभिषेक मनु सिंघवी की दलीलों पर सुनवाई शुक्रवार तक टाल दी।
असुद्दीन ओवैसी ने एएनआई को दिए इंटरव्यू में कहा कि चुनाव आयोग के नामांकन फॉर्म के बारे में: अगर आपके खिलाफ कोई FIR है, तो आपको इसकी जानकारी देनी होती है। अब, उनका कहना है कि कोई FIR है ही नहीं। तो चुनाव आयोग से मिलना होगा। राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी कहते हैं कि उनके खिलाफ कोई FIR नहीं थी, यह सिर्फ एक निजी शिकायत थी। यदि कोई एफआईआर (FIR) नहीं है, तो क्या कार्रवाई हो सकती है?… BNSS से पहले अगर आप कोर्ट में शिकायत करते, तो कोर्ट उसे रेफर करता और FIR दर्ज करने का आदेश देता। अब ऐसा नहीं है। अभिषेक मनु सिंघवी के बयान से, जो मैंने सुना और अखबारों में पढ़ा, उनका कहना है कि उनके खिलाफ कोई FIR नहीं है; सिर्फ़ एक प्राइवेट शिकायत थी और उन्हें कोर्ट में पेश होने के लिए नोटिस जारी किया गया था। मुझे पूरी सच्चाई नहीं पता…"
इधर, सांसद संजय सिंह ने कांग्रेस से ही सवाल पूछ लिए। संजय सिंह ने कहा कि जब कांग्रेस और सारे विपक्षी दलों को पता है कि चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त भाजपा के साथ मिले हुए हैं तो आपने सपोर्टिंग कैंडिडेट का पर्चा क्यों नहीं भरवाया? जबकि ऐसे वक्त में एक-एक सांसद महत्वपूर्ण है, राज्यसभा को लोकसभा हो, भाजपा वहां पर आराम से जीत गई। कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट जाए, मीनाक्षी नटराजन का पर्चा रद्द हुआ है यह गलत ढंग से खारिज हुआ है। चुनाव आयोग भाजपा के हाथों खेल रहा है, इसमें कोई दो राय नहीं है। यह पूरी घटना कई सवाल खड़े करती है।