
Bhopal news: मध्यप्रदेश के भोपाल शहर मेंबिजली की ओवरलोडिंग से अपने ट्रांसफॉर्मर्स को बचाने के लिए कंपनी ने अब ऑटो कट का रास्ता अपनाया है। ट्रांसफार्मर पर तय क्षमता से थोड़ा भी ज्यादा भार आया तो वह खुद बंद हो जाएगा। इससे ट्रांसफार्मर तो जलने से बचेगा, हालांकि लोड बढ़ने और ट्रांसफार्मर बंद होने से ट्रिपिंग बढ़ने की आशंका जरूर है। जिसे अन्य तरीकों से ठीक किया जाएगा। बता दें कि शहर के 5,500 ट्रांसफॉर्मर में ऑटो कट इक्विपमेंट लगाने की तैयारी है। पुराने शहर के कुछ ट्रांसफार्मर में इसका परीक्षण किया, अब पूरे शहर में किया जाएगा।
इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा असर उन इलाकों में देखने को मिलेगा जहां बिजली चोरी होती है या स्वीकृत लोड से ज्यादा बिजली का अनधिकृत इस्तेमाल किया जाता है। जिन क्षेत्रों में चोरी की बिजली से एसी या भारी मोटरें चलाई जाती है, वहां क्षमता से अधिक लोड आते ही ऑटो कट सिस्टम पूरे ट्रांसफॉर्मर की बिजली बंद कर देगा। जिससे पता चल जाएगा कि कहां बिजली चोरी हो रही है। बिजली कंपनी का कहना है कि इस व्यवस्था से जहां एक ओर वैध उपभोक्ताओं को ट्रांसफॉर्मर जलने की लंबी परेशानी से राहत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर बिजली चोरी पर भी लगाम लगेगी।
-जब क्षमता से अधिक बिजली का उपयोग होता है, तो ट्रांसफॉर्मर के अंदर लगा वाइंडिंग तार अत्यधिक व गर्म हो जाता है और उसमें भरा तेल उबलने लगता है। जिससे इसके फटने का खतरा बढ़ जाता है।
-इसके चलते शॉर्ट सर्किट या ब्लास्ट हो जाता है और पूरा ट्रांसफॉर्मर जल जाता है। ट्रांसफॉर्मर जलने के बाद उसे बदलने में कंपनी को 24 से 48 घंटे का समय लगता है, जिससे पूरे मोहल्ले में लंबे समय तक अंधेरा छा जाता है और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
-ऑटो कट से सप्लाई बंद होते ही ट्रांसफॉर्मर ओवरहीट होने से बच जाएगा और उसके जलने की संभावना खत्म हो जाएगी।
-गर्मी के पीक सीजन में तो प्रतिदिन 15 से 20 ट्रांसफॉर्मर खराब होने की स्थिति बनती थी. जिससे विद्युत कंपनी को लाखों रुपए का नुकसान होता था।