
Bhopal news: अंगदान यानी किसी मरीज की जिंदगी बचाने की कवायद। जैसे-जैसे लोग अंगदान का महत्व समझ रहे हैं, वैसे-वैसे मरीजों की जिंदगी बचने की संभावना भी बढ़ी है। मध्यप्रदेश में भोपाल एम्स ने प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की कमी से निपटने के लिए पहल की है। भोपाल स्थित एम्स में अब प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को अंगदान एवं प्रत्यारोपण का प्रशिक्षण दिया जाएगा। मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (एमपीसीएसटी) ने सीटीवीएस विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. विक्रम वट्टी के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
2025 में देश में 20,019 अंग प्रत्यारोपण हुए, लेकिन मध्य प्रदेश का योगदान करीब 2 प्रतिशत रहा। जनवरी से अगस्त 2025 के बीच प्रदेश में केवल 13 मृतक अंगदान दर्ज हुए। मृतक अंगदान की कम संख्या के पीछे जागरूकता के साथ प्रशिक्षित मानव संसाधन और प्रत्यारोपण सुविधाओं की कमी भी बड़ी चुनौती है।
कार्यशाला-सह-क्षमता निर्माण कार्यक्रम में डॉक्टरों को संभावित अंगदाता की पहचान, मब्रेन-डेथ की चिकित्सकीय पुष्टि और प्रमाणन, दाता प्रबंधन तथा परिवार की काउंसलिंग का प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही अंग निष्कर्षण यानी दाता से अंग निकालने, उन्हें सुरक्षित रखने, समय पर परिवहन और प्रत्यारोपण केंद्र तक पहुंचाने की प्रक्रिया भी समझाई जाएगी। आइसीयू टीम, नर्सिंग स्टाफ और ट्रांसप्लांट समन्वयकों की भूमिका पर भी प्रशिक्षण होगा। प्रशिक्षण में डॉ. योगेश निवारिया, डॉ. एम, किशन, डॉ. सुरेंद्र सिंह यादव, डॉ. राहुल शर्मा, डॉ. विक्रम वट्टी और डॉ. आदित्य सिरोही प्रमुख भूमिका निभाएंगे।
डॉ. विक्रम वट्टी ने बताया, ब्रेन डेथ के बाद अंगों को सुरक्षित रखने के लिए समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। अस्पताल में संभावित दाता की समय पर पहचान, परिवार से संवाद और पूरी प्रक्रिया के सही समन्वय में प्रशिक्षित टीम की अहम भूमिका होती है। लेकिन भोपाल सहित प्रदेश के बहुत से अस्पतालों प्रशिक्षित टीम नहीं है। एम्स का उद्देश्य प्रदेश में ही ऐसी दक्ष टीमें तैयार करना है, ताकि अंगदान और प्रत्यारोपण बढ़े, संभावित अंग व्यर्थ न जाएं और मरीजों को प्रत्यारोपण के लिए दूसरे राज्यों का रुख न करना पड़े।
मार्च 2026 में प्रमुख अंग प्रत्यारोपण की राष्ट्रीय प्रतीक्षा सूची में 89,839 मरीज थे। भारत में मृतक अंगदान दर प्रति दस लाख आबादी पर एक से भी कम है। ऐसे में राज्य में प्रशिक्षित डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या बढ़ाना अंगदान की पूरी प्रक्रिया मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है।