
फ्लैट्स की फोटो, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source - Patrika)
Bhopal news: मध्यप्रदेश के भोपाल शहर में बाणगंगा और उससे सटी बस्तियों की तंग गलियों में इन दिनों विकास की आहट खुशियों से ज्यादा खौफ लेकर आई है। नगर निगम की पुनरुद्धारित 'इन-सिचू स्लम रीडेवलपमेंट' योजना के तहत आठ माह पहले हुए सर्वे के बाद से करीब 6,042 आवास बनाने की योजना पर कार्य शुरू हो गया है। इस योजना से यहां पर लगभग 35 हजार लोगों के दिल में बेघर होने की अनिश्चितता गहराई हुई है। 'सूरज नीति-2023' का लक्ष्य शहर को 'झुग्गी मुक्त' बनाना है, लेकिन इस कागजी रणनीति के पीछे की जमीनी हकीकत सवालों के घेरे में है। योजना के मुताबिक, वार्ड 24 और 25 में फैले 24 हेक्टेयर क्षेत्र में पीपीपी मोड पर ईडब्ल्यूएस श्रेणी के 6,060 1-बीएचके फ्लैट्स बनाए जाने हैं। इसके तहत निजी डेवलपर्स अतिक्रमण मुक्त भूमि के एक हिस्से पर 'सूरज टावर्स' नाम से बहुमंजिला इमारतें तैयार करेंगे।
1970 के दशक से यहां रह रहे इमरान जैसे निवासियों का दर्द गहरा है। वर्षों से वैध बिजली-पानी कनेक्शन का उपयोग कर रहे लोग सवाल उठा रहे हैं कि विकास के नाम पर उनका स्थापित जीवन क्यों दांव पर लगाया जा रहा है। रहवासियों का यह खौफ बेवजह नहीं है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग (यूएडी) के अपने आंकड़े बताते हैं कि 2019 में शिवाजी नगर और अन्ना नगर में शुरू हुई आइएसएसआर परियोजनाएं टेंडर के छह चक्रों के बावजूद पूरी तरह फेल साबित हुई थीं। कठोर शर्तों और भूमि अधिग्रहण के विवादों के कारण निजी बिल्डरों ने कदम पीछे खींच लिए थे।
परियोजना की सबसे बड़ी चुनौती यहां का प्राकृतिक ढांचा है। मैनिट भोपाल ने 2013 के एक विस्तृत अध्ययन में बाणगंगा नाले और उससे संबंधित पर्यावरणीय बाधाओं के कारण इस 42 एकड़ क्षेत्र को बड़े पैमाने पर भारी निर्माण के लिए अनुपयुक्त पाया गया था। इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन का निर्माण संबंधित अध्ययन अभी तक नहीं हुआ है, जबकि नितिगत फैसले लगभग पूरे कर लिए गए हैं। यहीं योजना का बीच में फंसना तय है।
योजना पात्र परिवारों को पक्के आवास देना है। राजधानी को झुग्गी मुक्त बनाना है। - तन्मय शर्मा, अपर आयुक्त, निगम
Updated on:
20 Sept 2026 08:43 am
Published on:
20 Sept 2026 08:43 am
