Gauharganj Case : जिस दरिंदे को बीते 7 दिन से रायसेन पुलिस चप्पे-चप्पे पर तलाश रही थी, उसे भोपाल के मुस्लिम युवाओं ने गिरफ्तार कराने में अहम भूमिका निभाई।
Gauharganj Case :मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के गौहरगंज में बीते दिनों 6 साल की मासूम बच्ची से दरिंदगी करने वाला आरोपी सलमान उर्फ नजर काफी शातिर निकला। 21 नवंबर को रेप कर फरार हुआ आरोपी 7वें दिन गुरुवार देर रात राजधानी भोपाल के गांधी नगर इलाके से धराया। उसे गौहरगंज ले जा रही थी, तब भोजपुर के कीरतपुर में पुलिस गाड़ी पंचर हो गई। दूसरी गाड़ी में बैठाते समय आरोपी ने एक पुलिसकर्मी से पिस्टल छीनी और पुलिस पर फायरिंग करते हुए फरार होने का प्रयास किया। पुलिस ने शॉर्ट एनकाउंटर कर पैर में गोली मारी और आरोपी को दोबारा दबोच लिया।
इस पूरे मामले में एक और खास बात ये रही कि, जिस दरिंदे को बीते 7 दिन से रायसेन पुलिस चप्पे-चप्पे पर तलाश रही थी, उसे भोपाल के मुस्लिम युवाओं ने गिरफ्तार कराने में अहम भूमिका निभाई। मासूम के गुनहगार को दबोचने वाले ये 'भोपाली सूरमा' शहर के गांधी नगर इलाके के रहते हैं। इन्हीं मुस्लिम युवाओं के हौसले और जागरूकता ने साबित किया कि, वो सच में 'सूरमा भोपाली' हैं।
बताया जा रहा है कि, गोहरगंज का दरिंदा वारदात को अंजाम देने के बाद भागकर भोपाल आ गया था। शहर के गांधी नगर के सेक्टर-11 में वो किराये पर कमरा लेकर रहने की फिराक में था। उसी दौरान युवाओं की टोली ने उसे पहचान लिया। उसे बातों में उलझाकर रखा और पुलिस को सूचना दी। ऐसे में जिस दरिंदे की तलाश में बीते एक सप्ताह से पुलिस लगी थी, उसे इन युवाओं की मदद से भोपाल की गांधी नगर पुलिस ने दबोचने में सफलता हासिल की है।
युवाओं की इस सूझबूझ के चलते लंदन के कारोबारी राजवीर सिंह ने युवाओं को 1 लाख रूपए इनाम देने की बात कही है। हालांकि, भोपाल के इन मुस्लिम युवाओं ने राजवीर सिंह द्वारा घोषित किए इनाम की राशि भी पीड़ित बच्ची को देने की ही घोषणा कर दी है। उनकी इस घोषणा ने एक और मिसाल कायम की है।
वहीं, दूसरी तरफ राजवीर सिंह ने युवाओं को इनाम देने की घोषणा के साथ-साथ पीड़ित बिटिया की शिक्षा और उसके सभी खर्च खुद वहन करने की घोषणा की है। बता दें कि राजवीर मूल रूप से रायसेन जिले के सुल्तानपुर के रहने वाले हैं। वो लंदन में कारोबारी हैं। बेटी के अपने पैरों पर खड़े होने तक वो उसकी जिम्मेदारी निभाएंगे। राजवीर घटना के दूसरे दिन सुल्तानपुर पहुंच गए थे।
आरोपी सलमान गुरुवार रात 11.30 बजे गांधीनगर के सेक्टर-11 में घूम रहा था। अयान ने बताया, रोज की तरह दोस्त साजिद, अब्दुल, आसिफ, शाहबाज, सलमान, आदिल, रिजवान के साथ हम लोग काम खत्म कर टी-स्टॉल पर चाय पी रहे थे। तभी आसिफ ने संदिग्ध युवक को घूमते देखा। देखते ही उसे आरोपी का चेहरा जाना-पहचाना लगा। उन्हें तुरंत ही खबरों के साथ साथ सोशल मीडिया पर वायरल हो रही आरोपी सलमान की तस्वीरें याद आ गईं। उसने चुपके से उसकी तस्वीर खींची और दोस्त रिजवान और राजा को भेज दी। दोनों तुरंत ही मौके पर पहुंच गए।
आसिफ ने बताया, सलमान नशे में था। वो काफी देर से भटक रहा था। कुछ देर खाली ऑटो में बैठा रहा। आसिफ से सलमान ने कहा, मेरे पास मोबाइल नहीं है। मैं आष्टा का रहने वाला हूं और यहां रहने के लिए कमरा तलाश रहा हूं। कुछ देर बाद उसने ये भी कहा कि, वो किसी घटना में शामिल नहीं है। युवा पुलिस के आने तक उसे बातों पर उलझाए रखा। उन्होंने बातों बातों में दरिंदे से घटना के संबंध में पूछ लिया, जब उन्हें यकीन हो गया कि, ये वहीं आरोपी है, जिसे रायसेन पुलिस तलाश रही है, उन्होंने आरोपी को बातों में उलझाने के लिए मदद करने की तसल्ली भी दी।
रिजवान, आसिफ को सलमान ने अपना नाम 'नजर' बताया। तब कन्फर्म हो गया कि, यही आरोपी है। रिजवान ने शमीम को फोन कर कहा- बच्ची का दरिंदा सलमान मिल गया। इसके बाद मो. अब्बास, साजिद, अयान समेत सभी दोस्त मौके पर पहुंच गए। रिजवान ने पुलिसकर्मी राहुल गुरु को सलमान का फोटो भेजा। राहुल तुरंत आए, फोटो रायसेन पुलिस को भेजी। कुछ ही मिनट में पुष्टि हो गई कि, ये वहीं है जिसे पुलिस तलाश रही है। इससे पहले सलमान काफी देर बहाने बनाता रहा।
दुष्कर्म के बाद सलमान ने पुलिस के चंगुल से बचने के लिए भी रास्ता तैयार कर लिया था। 21 नवंबर को दुष्कर्म के बाद उसने गांव से ही राकेश आदिवासी के घर से दो मोबाइल चुरा लिए। परिवार रात 10 बजे सो गया था। परिवार की सागरी बाई ने बताया, रात 1 बजे नींद खुली तो दोनों मोबाइल गायब थे। दरवाजा भी बाहर से बंद था। जेठ के मोबाइल से फोन लगाया तो घंटी बजी, फिर मोबाइल बंद हो गए। पुलिस में शिकायत की, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की। दो दिन पहले सर्विलांस पर रखा, तब पुष्टि हो गई कि सलमान ने ही मोबाइल चुराए हैं। इसके बाद 27 नवंबर को पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की। पुलिस ने बताया, वो कुछ देर के लिए ही मोबाइल चालू करता था। इसलिए सही लोकेशन नहीं मिल रही थी। एसडीओपी शीला सुराणा का कहना है कि, परिवार मोबाइल चोरी नहीं, गुम होने की बात कह रहा था। 27 नवंबर को रिपोर्ट दर्ज की। तब जाकर पुष्टि हो सकी कि, उक्त आरोपी ही मोबाइल चुराकर फरार हुआ था।