
teachers demand review petition over tet mandatory rule
mp news: मध्यप्रदेश के लगभग 3 लाख शिक्षकों के भविष्य पर मंडरा रहे पात्रता परीक्षा के खतरे को लेकर विरोध तेज हो गए हैं। शुक्रवार को राजधानी भोपाल में म.प्र. राज्य कर्मचारी संघ ने जिला कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन के जरिए म.प्र. राज्य कर्मचारी संघ ने लोक शिक्षण संचालनालय के उस आदेश पर रोक लगाने की मांग की है, जिसमें 25-30 वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए भी पात्रता परीक्षा अनिवार्य करने का उल्लेख है।
लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा 3 मार्च को एक आदेश जारी किया गया जिसमें सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के निर्णय का हवाला देते हुए कार्यरत शिक्षकों के लिए जुलाई-अगस्त में टीइटी परीक्षा आयोजित करने का निर्देश दिया गया है। कर्मचारी संघ का तर्क है कि आरटीई एक्ट 2009 में लागू हुआ, जबकि वर्तमान में कार्यरत अधिकांश शिक्षक 1997-98 के शिक्षाकर्मी और संविदा नियमों के तहत नियुक्त हुए थे।
ज्ञापन में कहा गया है कि किसी भी कर्मचारी की सेवा-शर्तें उसकी नियुक्ति के बाद नहीं बदली जा सकतीं। संघ के अनुसार, DPI ने यह पत्र जारी करने से पहले राज्य सरकार, मंत्रिमंडल या स्कूल शिक्षा सचिवालय से कोई विधिक राय या लिखित अनुमोदन प्राप्त नहीं किया है, जो शासन की कार्यप्रणाली के विरुद्ध है। संघ ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पहले ही सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन (पुनरीक्षण याचिका) दायर कर दी है। जम्मू-कश्मीर सरकार भी इस निर्णय के स्थानीय प्रभाव की समीक्षा कर रही है। ज्ञापन में मांग की गई है कि मध्य प्रदेश शासन भी अपने शिक्षकों के हित में सुप्रीम कोर्ट जाए।
3 लाख शिक्षकों में व्याप्त है रोष
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि DPI के इस पत्र पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई और शासन ने रिव्यू पिटीशन दायर नहीं की, तो शिक्षक संवर्ग के हितों के संरक्षण हेतु म.प्र. राज्य कर्मचारी संघ स्वयं उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर करने के लिए बाध्य होगा। इस आदेश से उन शिक्षकों में भारी भय और असुरक्षा का माहौल है जो पिछले ढाई दशकों से शिक्षा व्यवस्था को संभाल रहे हैं।
Updated on:
13 Mar 2026 08:53 pm
Published on:
13 Mar 2026 08:53 pm
