
Bhopal News: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में प्रशासन की सख्ती और सामाजिक संगठनों की जागरुकता के चलते प्लास्टिक के ग्लास, कप और बड़े व्यापारियों ने प्लास्टिक की थैलियां आदि को काफी हद तक चलन से बाहर करना शुरू कर दिया है। लेकिन छोटी दुकानों, फुटकर बाजारों में प्लास्टिक की थैलियों की रोकथाम में प्रशासन अभी तक सफल नहीं हो सका है। इनकी छटाई तो घर-घर से कचरे लेने के लिए आ रही गाड़ियों में कर्मचारी कर रहे हैं। प्लास्टिक के कचरे का उपयोग सड़क निर्माण में करने का भी दावा भी सतही नजर आ रहा है।
विकल्प की कमी
2016 से प्लास्टिक पर रोकथाम की कार्रवाई चल रही है। इसके विकल्प के रूप में सरकारी विभाग, मॉल, शॉपिंग सेंटरों तक सीमित है। विकल्प पर काम नहीं हो रहा, जिसके चलते रोकथाम का असर नहीं दिखाई दे रहा है।
अजय मालवीय, समाजसेवी
बारिस में आफत
घरों से निकलने वाले कचरे से प्लास्टिक की छटाई तो की जा रही है, लेकिन बाजारों की नालियों में भरा प्लास्टिक नालियों को जाम कर रहा है। सफाई अमला नालियों की सफाई नहीं कर रहा है, जिससे नालियां जाम हैं।
दीपेश श्रीवास्तव, एडवोकेट
अधूरी कार्रवाई
प्रशासन पॉलीथिन रोकथाम की कार्रवाई फुटकर दुकानों, रेहड़ी वालों पर तो कभी-कभी करता है,लेकिन जहां से यह बनकर आ रही है, वहां रोकथाम का अभाव है। इनकी फैक्ट्रियों पर कार्रवाई की जाए तो बाजार में यह बिकने के लिए नहीं आएंगी।
धनश्याम दास गुप्ता, व्यापारी
अमल नहीं हो रहा
कई बार पुराने कपड़ों के थैले बनाने की योजनाएं शुरू हो चुकी हैं। सामाजिक संगठनों ने भी रोकथाम की मुहिम चलाई है, लेकिन अमल नहीं हो रहा है। इसके कचरे का सड़क निर्माण में उपयोग की खबरें तो सुर्खियों में थी, लेकिन सतह स्तर पर काम होते दिखाई नहीं दे रहा है।
ब्रज किशोर वर्मा, रहवासी
महंगे पड़ते हैं कपड़े के बैग
फल-सब्जी, मनिहारी से लेकर चाय-नास्ते वाले भी प्लास्टिक का उपयोग सस्ता पड़ने के चक्कर में कर रहे हैं। उन्हें कागज और कपड़े के बने सामान प्लास्टिक से महंगा पड़ रहा है। इस पर शासन को योजना बनाने की जरुरत है।
दीपा वर्मा, गृहणी
ब्लैक मार्केटिंग पर रोक
सार्वजनिक रूप से तो बाजार में खतरनाक घोषित प्लास्टिक के थैले, ग्लास, कप, पैकिंग का सामान नहीं बिक रहा है, लेकिन चोरी छिपे इसके बिकने पर रोकथाम नहीं हो रही है। प्रशासन उसकी रोकथाम में फेल है।
शैलेष प्रधान, ट्रांसपोर्टर