MP Congress: मध्यप्रदेश कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। पार्टी नेताओं की पिछली कुछ गतिविधियां बता रही हैं कि कांग्रेस वर्ग संघर्ष की ओर तेजी से बढ़ रही है। ऐसे समझें पूरा मामला...।
MP Congress: मध्यप्रदेश कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। पार्टी नेताओं की पिछली कुछ गतिविधियां बता रही हैं कि कांग्रेस वर्ग संघर्ष की ओर तेजी से बढ़ रही है। पार्टी के ही नेता सवर्णों को बुरा भला बोल रहे हैं और नेतृत्व मौन है। बाहरी लोगों द्वारा सवर्णों के खिलाफ दिए गए अनर्गल बयानों पर भी पार्टी की चुप्पी है। नेता किन कार्यक्रमों में शामिल होंगे और विभिन्न मुद्दों पर उनके बयानों की दिशा क्या होगी, इस पर पार्टी नेतृत्व का कोई नियंत्रण नहीं है। प्रदेश में इसके लिए अभी तक कोई गाइडलाइन नहीं होने से हर नेता अपनी दिशा खुद तय कर रहा है। इससे पार्टी में अंदरूनी तौर पर असंतोष बढ़ रहा है।
फिलहाल अप्रैल में खाली हो रही दिग्विजय सिंह की राज्यसभा सीट को पाने की जद्दोजहद से भी इसे जोड़कर देखा जा रहा है। प्रदेश में एससी के लिए 35 और एसटी के लिए 47 सीटें आरक्षित होने के चलते कांग्रेस और भाजपा दोनों इन्हें लुभाने में जुटी हैं। लेकिन कुछ खास वर्गों के लिए कांग्रेस नेताओं ने अन्य के खिलाफ जो जहर उगला है, उससे पार्टी संगठन सृजन की बजाय संगठन विसर्जन की ओर बढ़ती नजर आ रही है।
प्रदेश में संगठन को मजबूत करने के लिए - अभी बूथ चलो, गांव चलो अभियान चलाया जा रहा है। विधायक फूलसिंह बरैया ने जो बयान दिया वह उनके व्यक्तिगत विचार हैं। हमने स्पष्टीकरण मांगा है। सार्वजनिक तौर पर उन्होंने खेद भी जताया।- जीतू पटवारी, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस
कांग्रेस(MP Congress) के प्रदेश कार्यालय में 26 दिसंबर को हुई कार्यकारिणी की बैठक में प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, दिग्विजय सिंह, प्रदेशाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष आदि की मौजूदगी में विधायक फूलसिंह बरैया ने दलितों की पैरवी कर सवणों के खिलाफ जमकर जहर उगला लेकिन सभी नेता सुनते रहे. किसी न उन्हें टोका तक नहीं।
राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता में कुछ समय बाद ही दलित एजेंडा-2 बनाने के लिए बैठक शुरू हुई। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार नहीं पहुंचे। इस दौरान भी विधायक श्ररैया ने सवणों के खिलाफ बोला। उन्होंने बाबा साहब आंबेडकर का हवाला देते हुए दलितों के लिए सेपरेट इलेक्शन की पैरवी की। कहा, ऐसा नहीं होने पर दलितों की हालत मुंहबंचे कुत्ते जैसी हो जाएगी।
दलित एजेंडा संबंधी भोपाल डिक्लेरेशन-2 बनाने संबंधी बैठक में ही दिग्विजय सिंह ने तीसरी बार राज्यसभा नहीं जाने का ऐलान कर दिया। इसके बाद पार्टी के अजा विभाग के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने पत्र लिख दलित को राज्यसभा भेजने की बात कही। पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने भी समर्थन किया। दिग्विजय सिंह ने भी कह दिया कि वे भी इसके समर्थन में हैं और यदि दलित सीएम बनता है तो वे उसका स्वागत करेंगे।
विधायक पफूल सिंह बरैया ने इसके बाद फिर सवों पर दलित और आदिवासी महिलाओं के साथ रेप करने जैसी अनर्गल बातें कहीं, बाद में विवाद बढ़ने पर उन्होंने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि उन्होंने एक किताब में यह बातें पढ़ी थी. यह उनके विवार नहीं हैं। बरैया के खिलाफ कार्रवाई की मांग ने जोर पकड़ा तो पार्टी नेतृत्व ने स्पष्टीकरण मांगा लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की। इसी बीच दिग्विजय सिंह बचाव में आए और कहा कि बरैया का इसमें कोई दोष नहीं है, कार्रवाई ऐसी बातें अपनी पुस्तक में लिखने वाले लेखक के खिलाफ होना चाहिए।
राजधानी में अपाक्स के सम्मेलन में 18 जनवरी को पूर्व विधायक आरडी प्रजापति ने कथावाचकों और सवर्ण समाज के खिलाफ जमकर जहर उगला, उसमें महिला कांग्रेस की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विभा पटेल मौजूद थीं।
आइएएस संतोष वर्मा द्वारा ब्राद्वाण बेटियों के संबंध में दिए गए अनर्गल बयान के खिलाफ जब पूरे प्रदेश में प्रदर्शन हो रहे थे तब भी पार्टी मौन रही। पार्टी के जो श्राद्वाण नेता विरोध में शामिल हुए उनकी नेतृत्व ने क्लास लगाई। जबकि कई नेताओं की अनर्गल बयानबाजी पर कार्रवाई नहीं की।