
Datia By Election - दतिया विधानसभा उपचुनाव-2026 में प्रचार में तेजी आ गई है। गुरुवार को दोनों प्रमुख दलों बीजेपी और कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गांव-मोहल्लों में घूमे। बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने बड़ौनी स्थित कुशवाहा धर्मशाला में जनसभा को संबोधित किया। यहां जनप्रतिनिधि, पार्टी पदाधिकारी, कार्यकर्ता, गणमान्य लोगों के साथ बड़ी संख्या में आमजनों को देख वे उत्साहित हो उठे। इधर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रचार के दौरान कहा कि भाजपा के प्रत्याशी को न कोई जानता है और न ही उन्हें वोट देना चाहता है। दोनों दलों में जबर्दस्त जुबानी लड़ाई भी चल रही है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी के एक बयान पर सियासी बवाल मच गया है। बीजेपी ने इसका वीडियो जारी किया है जिसमें वे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को निष्पक्ष चुनाव के लिए कड़ी चेतावनी देते दिख रहे हैं। बीजेपी ने जीतू पटवारी के इस बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि वे अधिकारियों पर दबाव डाल रहे हैं।
पुलिस प्रशासन के अधिकारी भी सुनलें इस वीडियो के माध्यम से… अगर किसी ने किसी भी कार्यकर्ता को बिना काम के पुलिस अधिकारी, कर्मचारी, थाने, टीआई, एसपी… कोई हरकत की तो मेरा नाम जीतू पटवारी है, याद रख लेना…यहीं पर पहले चुनाव बाद में करुंगा, आपका हिसाब पहले करुंगा… पुलिस के अधिकारी समझ लेना, प्रशासन के कर्मचारियों को भी समझाना चाहता हूं, चुनाव निष्पक्ष होना चाहिए…।
बीजेपी ने पीसीसी चीफ जीतू पटवारी के इस बयान पर गहरी आपत्ति जताई है। इसे पुलिस-प्रशासन का मनोबल तोड़ने और चुनावी प्रक्रिया पर दबाव बनाने की सोची-समझी कोशिश करार दिया है। बीजेपी के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने पीसीसी चीफ जीतू पटवारी का धमकी भरा वीडियो जारी करते हुए कहा कि उनकी भाषा बता रही है कि कांग्रेस को अब लोकतंत्र और दतिया की जनता के जनादेश पर भरोसा नहीं रहा। उन्होंने कहा कि उपचुनाव में संभावित हार की हताशा में कांग्रेस गीदड़ भभकियां देने पर उतर आई है पर वोटर्स डरनेवाले नहीं।
बीजेपी के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने अपने एक्स पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी का वीडियो जारी करते हुए लिखा:
कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की भाषा बता रही है कि कांग्रेस को अब लोकतंत्र और दतिया की जनता के जनादेश पर भरोसा नहीं रहा।
दतिया विधानसभा उपचुनाव में संभावित हार की हताशा क्या इतनी बढ़ गई है कि अब सार्वजनिक मंचों से पुलिस और प्रशासन को “देख लेने” जैसी धमकियां दी जा रही हैं?
सवाल है, क्या कांग्रेस चुनाव जनता के विश्वास से जीतना चाहती है या भय, दबाव और धमकियों की राजनीति से?
निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने में जुटे पुलिस-प्रशासन को इस तरह खुले मंच से धमकाना न केवल उनकी निष्पक्षता पर सवाल खड़े करने का प्रयास है, बल्कि उनका मनोबल तोड़ने और चुनावी प्रक्रिया पर दबाव बनाने की सोची-समझी कोशिश भी प्रतीत होती है।
लेकिन कांग्रेस शायद भूल रही है कि न दतिया की जनता ऐसी गीदड़ भभकियों से डरने वाली नहीं है और न ही प्रशासन को इस तरह दबाव में लिया जा सकता है।
दतिया की जनता ने मन बना लिया है, उसे धमकी नहीं, विकास चाहिए; अराजकता नहीं, सुशासन चाहिए।