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कौन बनेगा नया डीजीपी! सबसे बड़े पद की दौड़ में एमपी के 11 वरिष्ठ आइपीएस

MP new DGP- गृह विभाग अक्टूबर में यूपीएससी को भेजेगा प्रस्ताव, चयन प्रक्रिया शुरु नए डीजीपी के लिए कपूर, प्रज्ञा व जैन समेत 11 वरिष्ठ आइपीएस के नाम भेजे
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11 senior IPS officers in the race for MP new DGP

IPS Officers MP - Demo Pic (फोटो- Patrika.com)

MP DGP - रूपेश मिश्रा भोपाल. प्रदेश को नया मुख्य सचिव मिलने के साथ ही अब पुलिस महकमे नए मुखिया यानी डीजीपी की चयन प्रक्रिया शुरू हो गई है। पुलिस मुख्यालय ने जेल डीजी वरुण कपूर, होमगार्ड डीजी प्रज्ञा ऋचा एवं ईओडब्ल्यू डीजी उपेंद्र जैन समेत 11 आइपीएस के नामों का एक प्रस्ताव गृह विभाग को भेज दिया है। ये सभी नाम मप्र आइपीएस कैडर में वरिष्ठता क्रम से लिए हैं। इन नामों में ज्यादातर स्पेशल डीजी रैंक के अधिकारी है। अब गृह विभाग द्वारा भेजे गए प्रस्ताव की जांच की जाएगी और उसे तय 12 कॉलम के फॉर्मेंट में पूरी जानकारी के साथ यूपीएससी को भेजा जाएगा। यहां यूपीएससी तीन नाम तय करेगा। इन्हीं में से एक नाम पर नए डीजी के रूप में मुहर लगाई जाएगी। बता दें कि मौजूदा डीजीपी कैलाश मकवाणा का कार्यकाल नवंबर 2026 में समाप्त हो रहा है। इस बीच सीएम मोहन यादव ने पुलिस विभाग के लिए 9662 नई भर्तियों की स्वीकृति दे दी है। प्रदेश के डीजीपी कैलाश मकवाणा ने इसे सशक्त पुलिस, सुरक्षित मध्यप्रदेश की दिशा में बड़ा कदम बताया है।

11 नामों के पैनल में ये अधिकारी शामिल:

11 नामों के पैनल में 1991 बैच के वरुण कपूर, प्रज्ञा ऋचा और उपेंद्र जैन का नाम है। वहीं साल 1992 बैच के पंकज श्रीवास्तव, आदर्श कटियार, जी अखेतो सेमा और 1993 बैच के अनिल कुमार, रवि गुप्ता के साथ 1994 बैच के अनंत सिंह, मनमीत सिंह नारंग, राजाबाबू सिंह और डीजी गुप्ता का नाम शामिल है।

सीनियर अफसरों में ये तीन नाम सबसे ऊपर

वरिष्ठता के क्रम से देखा जाए तो जेल डीजी वरुण कपूर, होमगार्ड डीजी प्रज्ञा ऋचा और ईओडब्ल्यू डीजी उपेंद्र जैन का नाम सबसे ऊपर है। इनमें उपेंद्र जैन और प्रज्ञा ऋचा में कड़ी टक्कर है।

जैन ऐसे अफसरों में शुमार हैं जिन्हें फील्ड के साथ-साथ ऑफिस वर्क का भी लंबा अनुभव है। वे उज्जैन, जबलपुर एसपी की कमान संभालने के बाद एमपी स्पोर्टस एंड वेलफेयर, टेलीकॉल, पुलिस हाउसिंग के बाद अब ईओडब्ल्यू की कमान संभाल रहे है।

वहीं महिला सशक्तीकरण का दांव चला तो होमगार्ड डीजी प्रज्ञा ऋचा सरकार की पहली पसंद होंगी, क्योंकि मप्र के इतिहास में कोई महिला आइपीएस डीजीपी नहीं रही हैं। ऐसे में प्रज्ञा ऋचा को डीजीपी जैसे अहम पद पर बैठाकर सरकार बड़ा संदेश दे सकती है। उनकी सबसे बड़ी खासियत संवेदनशीलता और सहजता है।

डीजीपी के चयन की ये है प्रक्रिया

राज्य सरकार द्वारा वरिष्ठ आइपीएस अधिकारियों का वरिष्ठता, सेवा रिकॉर्ड, अनुभव और शेष सेवा अवधि के मापदंड़ों पर पैनल तैयार कर यूपीएससी को भेजा जाता है। जहां यूपीएससी की इंपैनलमैंट कमेटी स्क्रूटनी करती है।

तीन में से एक अधिकारी बनेंगे डीजीपी

इसमें सेवाकाल की अवधि, सेवा रिकॉर्ड, विभिन्न क्षेत्रों का अनुभव सहित सामान्य नियम के तहत अधिकारी के पास कम से कम 6 माह की शेष सेवा अवधि भी महत्वपूर्ण है। इस आधार पर तीन अधिकारियों का चयन कर पैनल राज्य सरकार के भेजा जाता है। राज्य सरकार इन तीन में से एक अधिकारी को डीजीपी नियुक्त करती है।

अंतिम चयन का अधिकार राज्य सरकार के पास

अंतिम चयन का अधिकार राज्य सरकार के पास रहता है लेकिन चयन यूपीएससी द्वारा तैयार पैनल में से ही होना चाहिए। नियुक्त डीजीपी का न्यूनतम कार्यकाल दो साल का होना चाहिए भले ही उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख उससे पहले क्यों न आती हो।

पुलिस में 9662 नई भर्तियों की स्वीकृति

इधर सीएम मोहन यादव ने पुलिस में 9662 नई भर्तियों की स्वीकृति दे दी है। इस पर डीजीपी कैलाश मकवाना ने खुशी जाहिर करते हुए प्रदेश की सुरक्षा के लिए बड़ा कदम बताया।