
Narottam Mishra - चंबल संभाग के विजयपुर में करीब डेढ़ साल पहले हुए उपचुनाव के बाद अब ग्वालियर के दतिया में उपचुनाव होने जा रहे हैं। भाजपा के लिए यह चुनाव विजयपुर में मिली हार के बाद कड़ी परीक्षा से कम नहीं होगा। दतिया सीट सत्ता- संगठन की प्रतिष्ठा से जुड़ी है, यहां 15 सालों तक लगातार भाजपा का कब्जा रहा है। हालांकि कांग्रेस ने पिछली बार 2023 के विधानसभा चुनाव में नरोत्तम मिश्रा को हराते हुए चौंका दिया था। उनकी हार बीजेपी भुला नहीं पा रही है। इसी कारण पार्टी दतिया उपचुनाव को लेकर पूरी तरह गंभीर है। सीट पर जीत के लिए माइक्रो प्लान बनाया जाएगा। इसके अंतर्गत प्रदेश के बड़े नेता भी दतिया में ही डेरा डालेंगे।
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के पारिवारिक कार्यक्रम से लौटते ही जल्द ही सत्ता-संगठन की एक अहम बैठक प्रस्तावित है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, अगले सप्ताह में होने वाली इस बैठक में पार्टी माइक्रो लेवल (बूथ स्तर) पर रणनीति बनाएगी। दतिया चुनाव को लेकर भाजपा वरिष्ठ नेताओं की पूरी एक टीम तैयार करेगी। इसमें चुनाव प्रभारी के नेतृत्व में पूरा चुनावी ऑपरेशन चलाया जाएगा।
इधर, पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने क्षेत्र में सक्रियता बढ़ा दी है। अगर भाजपा दोबारा नरोत्तम को मौका देती है तो यह उनके सियासी जीवन के लिए भी अग्निपरीक्षा होगी। नरोत्तम मिश्रा को गृह मंत्री रहते हुए हार का सामना करना पड़ा था जोकि उनके राजनैतिक केरियर के लिए घातक साबित होते दिख रहा है। यही वजह है वे न केवल लगातार जनता के बीच जा रहे हैं वहीं यह भी कह रहे हैं कि यदि हमसे कोई गलती हुई है तो उसमें सुधार करेंगे।
भाजपा दतिया चुनाव को इसलिए भी गंभीरता से ले रही है क्योंकि विजयपुर उपचुनाव में भाजपा हार का मुंह देख चुकी है। वहां भाजपा को जबर्दस्त झटका लगा था। पार्टी ने कांग्रेस से पाला बदलकर आने वाले रामनिवास रावत को वन मंत्री बनाया था। वे मंत्री रहते हुए कांग्रेस के प्रत्याशी मुकेश मल्होत्रा से 7288 वोटों से चुनाव हार गए थे। रामनिवास रावत की हार बीजेपी के लिए सदमे से कम नहीं थी। ऐसे में भाजपा अब दतिया में कोई कोर कसर नहीं छोडऩा चाहती।
उपचुनाव के लिए भाजपा स्थानीय स्तर पर सारी तैयारियां करने में जुटी है। बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को एक्टिव किया जा रहा है। बीजेपी संगठन विजयपुर वाली गलतियों को नजरअंदाज करने की भूल अब नहीं करने वाला है।