भोपाल

CM मोहन यादव ने निभाया वादा, लौट सकती है गायक सुनील लोधी की आंखों की रोशनी, इलाज प्रक्रिया शुरू

Bundeli singer Sunil Lodhi: नेत्रहीन बुंदेली गायक सुनील लोधी ( की आंखों के इलाज की प्रक्रिया शुरू हो गई है। उनकी आवाज ने लाखों दिल जीते हैं।
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Updated: 4 Nov 2026, 4:36 PM IST
नेत्रहीन सिंगर सुनील लोधी, (Photo Source: SUNEEL LODHI INSTAGRAM )
नेत्रहीन सिंगर सुनील लोधी, (Photo Source: SUNEEL LODHI INSTAGRAM )

Bhopal news: 'हनुमान अंश' के नाम से पहचान बनाने वाले नेत्रहीन सिंगर सुनील लोधी की जिंदगी में अब एक नई उम्मीद ने दस्तक दी है। एमपी के सीएम मोहन यादव ने अपना वादा निभाया है। उन्होंने हनुमान अंश फिल्म के गायक सुनील लोधी की आंखें ठीक कराने का वादा किया था। अब सुनील की आंखों के उपचार की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

खुशी की बात यह है कि जिस आवाज ने लाखों दिलों को छुआ, अब उसकी आंखों में रोशनी लौटने की उम्मीद जगी है। बता दें कि सुनील सागर के युवा बुंदेली गायक हैं। सितंबर 2026 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सुनील और उनके परिवार से मुलाकात कर उपचार, संगीत शिक्षा और 1 लाख की सम्मान निधि देने का भरोसा दिया था। सीएम ने अपना वादा निभाते हुए सुनील के बेहतर भविष्य की दिशा में एक और कदम बढ़ाया है।

गायकी से जीता लाखों का दिल

सुनील की आवाज ने अपनी गायकी से लाखों लोगों का दिल जीता है। अब आंखों के उपचार की शुरुआत उनके जीवन में नई उम्मीद लेकर आई है। आंखों के इलाज की प्रक्रिया शुरू होने के बाद सुनील ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट शेयर किया है। उन्होंने जानकारी दी और भगवान से अपनी आंखों की रोशनी वापस मिलने की प्रार्थना की। सुनील ने कुछ तस्वीरें भी साझा की हैं, जिनमें डॉक्टर उनकी आंखों की जांच करते नजर आ रहे हैं। इन तस्वीरों के साथ उन्होंने अपने दिल की बात लिखी और उन सभी लोगों का शुक्रिया अदा किया, जो उनके लिए लगातार दुआएं कर रहे हैं। फिल्म की निर्माता अनुप्रिया नागर उनके आंखों के इलाज में मदद के लिए आगे आई और वे खर्च उठाने को तैयार हैं। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी इलाज के लिए सहायता का भरोसा दे चुके हैं।

गायन से बनाई पहचान

हालांकि, डॉक्टरों की विस्तृत जांच के बाद ही पता चलेगा कि उनकी आंखों की रोशनी लौटने की कितनी संभावना है। मध्य प्रदेश के सागर जिले के छोटे से गांव अगरा के रहने वाले 25 वर्षीय सुनील सिंह लोधी की कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। सुनील जन्म से दृष्टिबाधित हैं और आर्थिक परिस्थितियों के चलते उनकी पढ़ाई भी पूरी नहीं हो सकी, लेकिन उन्होंने अपनी इस मुश्किल को कभी अपनी पहचान नहीं बनने दिया।

करीब 10-11 साल की उम्र से ही वह बुजुर्गों के बीच बैठकर पारंपरिक बुंदेली वाद्य यंत्र तमूरा बजाना और भजन गाना सीखने लगे थे। गांव की चौपालों, धार्मिक आयोजनों और स्थानीय कार्यक्रमों में भजन गाते-गाते उनकी आवाज लोगों तक पहुंचने लगी। वह ट्रेनों में भजन गाकर अपनी आजीविका चलाते थे। साल 2019 में सोशल मीडिया पर उनके गायन को पहचान मिली और हनुमान भजन 'ओ मोरे संकट के कटैया हनुमान' का वीडियो वायरल हो गया। इसी आवाज ने उन्हें फिल्मी दुनिया तक पहुंचाया।

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4 Nov 2026, 4:36 PM IST
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