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दल-बदल मामले में बीना विधायक निर्मला सप्रे की बढ़ी मुश्किलें, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

Nirmala Sapre : बीना विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता पर सुप्रीम कोर्ट ने विधानसभाध्यक्ष को 2 माह में ​फैसला लेने को कहा
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भोपाल

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deepak deewan

•

Updated: 4 Nov 2026, 2:54 PM IST

दल-बदल मामले में बीना विधायक निर्मला सप्रे की बढ़ी मुश्किलें, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला दल-बदल मामले में बीना विधायक निर्मला सप्रे की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष को उनकी सदस्यता पर 2 महीने में फैसला करने का आदेश जारी किया है। बीना विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता पर सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट image patrika enhanced AI

Nirmala Sapre : दल-बदल मामले में बीना विधायक निर्मला सप्रे की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष को उनकी सदस्यता पर 2 महीने में फैसला करने का आदेश जारी किया है। मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की याचिका पर शीर्ष कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है। इसे कांग्रेस की बड़ी जीत बताया जा रहा है। निर्मला सप्रे पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की टिकट पर जीती थीं लेकिन बाद में बीजेपी में शामिल हो गई थीं। इसके बाद उन्होंने मीडिया में हमेशा भाजपा में शामिल होने की बात नकारी है हालांकि वे पार्टी के कार्यक्रमों में देखी गई हैं। इतना ही नहीं, वे कहती हैं कि उन्होंने कांग्रेस नहीं छोड़ी है।

विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा निर्देश दिया। कोर्ट ने मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष को इस मामले में 2 महीने में फैसला करने को कहा है। कांग्रेस नेता एवं एमपी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने निर्मला सप्रे की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग को लेकर याचिका दायर की है।

दल-बदल से जुड़े मामलों में समय पर निर्णय होना चाहिए

बुधवार को मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा की पैरवी के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दसवीं अनुसूची (दल-बदल कानून) से जुड़े मामलों का शीघ्र निराकरण किया जाना चाहिए, भले ही हाईकोर्ट ने मामले में तात्कालिकता न मानी हो। अधिवक्ता विवेक तन्खा ने मामले को संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दल-बदल का स्पष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि निर्मला सप्रे ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता लेकिन बाद में पार्टी छोड़ दी। उन्होंने भाजपा के पक्ष में चुनाव प्रचार भी किया। मामले में विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष अयोग्यता याचिका पर अभी तक अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। इसके बाद शीर्ष अदालत ने मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को निर्मला सप्रे के खिलाफ लंबित अयोग्यता याचिका पर तय समय सीमा में अंतिम फैसला करने को कहा है।

बीना से विधायक निर्मला सप्रे ने वर्ष 2023 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता था। मई 2024 में लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान वे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में भाजपा में शामिल हो गईं। इसके बाद कांग्रेस ने उनके खिलाफ दल-बदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की मांग की।

हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने पर सुप्रीम कोर्ट गए सिंघार

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने 30 जून 2024 को विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष निर्मला सप्रे की सदस्यता समाप्त करने का आवेदन दिया। उन्होंने हाईकोर्ट में भी याचिका लगाई। जून 2026 में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने यह कहते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी कि विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष मामला चल रहा है और विधायक निर्मला सप्रे ने कांग्रेस छोड़ने या भाजपा में शामिल होने से साफ इनकार किया है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद उमंग सिंघार ने सुप्रीम कोर्ट याचिका लगाई थी।