भोपाल

Bhopal Aiims: दुनिया छोड़ चला गया बेटा, पसरा मातम, परिवार के 1 बड़े फैसले ने 3 परिवारों में लौटा दी खुशियां

Organ donation process: विलास तांती शर्मा को ब्रेन डेड घोषित होने के बाद परिवार ने उनकी किडनी और लिवर दान कर तीन मरीजों को नया जीवन दिया। एम्स भोपाल से बंसल हॉस्पिटल तक ग्रीन कॉरिडोर बनाकर अंगों को महज 15 मिनट में पहुंचाया गया।
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Oct 16, 2026
ऑपरेशन थिएटर का फोटो, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- magnific)
ऑपरेशन थिएटर का फोटो, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- magnific)

Bhopal news: एक परिवार ने पथराई उम्मीद और अपने को खोने के गम के बीच ऐसा फैसला लिया, जिससे तीन लोगों को नई जिंदगी मिल गई। नर्मदापुरम जिले के बनखेड़ी निवासी 31 वर्षीय विलास तांती शर्मा को एम्स भोपाल में ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद परिजनों ने उनकी किडनी और लिवर दान करने की सहमति दी। इससे तीन जरूरतमंद मरीजों को अंग प्रत्यारोपण का लाभ मिला। मध्यप्रदेश में अंगदान की इस पहल में एम्स भोपाल और बंसल हॉस्पिटल कीटीमों ने समन्वय से काम किया। इस पूरे काम को करने के पीछ विलास के परिवाल का बहुत बड़ा हाथ है। उनके इस निर्णय से 3 लोगों को नई जिंदगी मिली है।

15 मिनट में बंसल हॉस्पिटल पहुंचे अंग

विलाश की एक किडनी और लिवर बंसल हॉस्पिटल में भर्ती दो मरीजों को प्रत्यारोपित किए गए। वहीं, दूसरी किडनी एम्स भोपाल में भर्ती एक मरीज को दी गई। अंगों को समय पर पहुंचाने शाम 7:40 बजे एम्स भोपाल से बंसल हॉस्पिटल तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। इसके जरिए किडनी और लिवर महज 15 मिनट में सुरक्षित पहुंचाए गए। जिसके बाद दूसरे मरीजों में प्रत्यारोपण का काम शुरु किया गया।

परिजनों की सहमति से अंगदान संभव

डॉक्टरों ने परिजनों को ब्रेन-स्टेम डेथ की स्थिति और उसके चिकित्सकीय पहलुओं की जानकारी दी। इसके बाद परिवार ने स्वेच्छा से अंगदान का निर्णय लिया। अंगों को समय पर पहुंचाने दोनों अस्पतालों की टीमों ने समन्वय के साथ काम किया। अंगदान की प्रक्रिया में समय का विशेष ध्यान रखा गया, ताकि प्रत्यारोपण के लिए अंगों की गुणवत्ता बनी रहे। अस्पतालों की टीमों ने तय प्रोटोकॉल के अनुसार सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी कीं। परिवार के इस फैसले से जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिलने की उम्मीद जगी है।

अंगदान से मिलता है नया जीवन

विलाश का अंगदान दूसरे परिवारों के लिए प्रेरणा है। दान किए गए अंग मरीज का जीवन बचाने का अवसर बनते हैं। ऐसे में अंगदान के प्रति जागरूकता व परिजनों की सहमति अहम भूमिका निभाती है। विलाश के परिवार के फैसले ने दुख की घड़ी में तीन मरीजों के लिए नई उम्मीद जगाई। अंगदान से किसी जरूरतमंद को नया जीवन मिल सकता है और उसके परिवार को भी राहत मिलती है। विशेषज्ञों के अनुसार, अंगदान के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना समय की जरूरत है। विलाश के परिवार का यह निर्णय बताता है कि कठिन समय में लिया गया एक मानवीय फैसला कई जिंदगियों में खुशियां लौटा सकता है।

Updated on:
16 Oct 2026 08:16 am
Published on:
16 Oct 2026 08:16 am