
Breast Cancer Awareness Day: बदलती लाइफस्टाइल के कारण हर साल कई महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर से अपनी जान गंवा रही है। शरीर में कैंसर वैसे तो कई प्रकार के होते है लेकिन महिलाओं में होने वाला ब्रेस्ट कैंसर कॉमन हो चुका है। शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन्स का लेवल बढ़ जाने के कारण स्तन कैंसर होने का खतरा दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। आपको जानकारी के लिए बता दें कि हर साल 13 अक्टूबर को ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस डे मनाया जाता है। उसको मनाने के मुख्य उद्देश्य महिलाओं नें ब्रेस्ट कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाना है।
बात मध्यप्रदेश की करें यहां पर 35 से 37 साल की उम्र की महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर की चपेट में आ रही हैं, जबकि देश में औसत उम्र 40 से 45 साल है। जबलपुर मेडिकल कॉलेज के ब्रेस्ट कैंसर क्लिनिक के मुताबिक हर साल ब्रेस्ट क्लिनिक में 500 महिलाएं इलाज के लिए आती हैं। एम्स भोपाल की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 60% मरीज तीसरे या चौथे चरणमें अस्पताल पहुंचते हैं, जबकि पहले चरण में इसका पता चलने पर इसे काफी हद तक ठीक किया जा सकता है। वहीं धार जिला अस्पताल जिला अस्पताल में पिछले तीन साल में 200 से अधिक कैंसर मरीज उपचार के लिए पहुंचे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इनमें करीब 30 प्रतिशत मरीज स्तन कैंसर से पीड़ित महिलाएं है।
बदलती जीवनशैली के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी, बीमारी के लक्षणों को नजरअंदाज करना और सामाजिक संकोच भी समय पर जांच में बाधा बन रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, ब्रेस्ट कैंसर दुनिया के सबसे कॉमन कैंसर में से एक है। भारत में हर साल करीब 2 लाख से अधिक महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर डाइग्नोज हो रहा है। विश्व में लगभग 20 लाख महिलाएं स्तन कैंसर से पीड़ित हैं और भारत में प्रत्येक 22 महिलाओं में से एक महिला इस बीमारी से प्रभावित है।
ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित कई महिलाएं अपनी परेशानी खुलकर नहीं बता पातीं और चिकित्सकीय सलाह लेने में देर कर देती हैं। महिलाओं के सामने एक बड़ी चुनौती बीमारी के बारे में खुलकर बात न कर पाना भी है। परिवार की जिम्मेदारियों और घरेलू कामकाज के बीच वे अपनी सेहत को प्राथमिकता नहीं दे पातीं। स्तन में गांठ, आकार में बदलाव या अन्य असामान्य लक्षण होने पर भी कई बार जांच टाल दी जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, स्तन कैंसर का जोखिम उम्र, पारिवारिक इतिहास और कुछ हार्मोन संबंधी कारकों से प्रभावित हो सकता है। मोटापा, शारीरिक गतिविधि की कमी और शराब का सेवन भी जोखिम बढ़ाने वाले कारकों में शामिल है। हालांकि, हर मरीज में बीमारी का कारण एक जैसा नहीं होता और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के बावजूद स्तन कैंसर हो सकता है। इसलिए खान-पान और व्यायाम के साथ शरीर में होने वाले बदलावों के प्रति सतर्क रहना भी जरूरी है।
स्तन में किसी तरह की गांठ या असामान्य बदलाव महसूस होने पर चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है। स्तन कैंसर की जांच में मैमोग्राफी, सोनोग्राफी और जरूरत के अनुसार एफएनएसी जैसी जांचों की मदद ली जाती है। स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध परामर्श और जांच सुविधाओं का लाभ लेकर बीमारी की पहचान समय पर की जा सकती है। - डॉ. अनिता सिंघारे, सीएमएचओ धार
बीमारी से घबराने के बजाय उसका सामना करना चाहिए। रहन-सहन में सुधार, शारीरिक गतिविधि और संतुलित खान-पान के साथ समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना महत्वपूर्ण है। -डॉ. दिनेश कुमार चौधरी, एमडी मेडिसिन जिला अस्पताल धार