भोपाल

ट्विशा केस: गिरिबाला सिंह के स्टेटस और स्किल से डरे सीबीआई अधिकारी, 5 वजहों से घिरीं

Giribala Singh- रिमांड के लिए गिरिबाला सिंह के स्टेटस और स्किल को आधार बनाया, अधिकारियों ने कोर्ट में आशंका जताई कि यदि रिमांड पर नहीं रहीं तो वे जांच प्रभावित कर सकती हैं
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Updated: 30 May 2026, 7:54 AM IST
Twisha mother-in-law Giribala Singh held considerable clout in the court
Twisha mother-in-law Giribala Singh held considerable clout in the court

Giribala Singh- ट्विशा शर्मा Twisha Sharma की संदिग्ध मौत के मामले में सीबीआई ने भोपाल की पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को 5-5 दिन की रिमांड पर ले लिया है। भोपाल कोर्ट ने शुक्रवार को दोनों को 2 जून तक के लिए सीबीआई को सुपुर्द कर दिया। ट्विशा शर्मा की सास गिरिबाला सिंह करीब पौने दो साल तक भोपाल की जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर रहीं हैं। इतना ही नहीं, वे क्राइम सीन मैनेजमेंट में भी दक्ष हैं। गिरिबाला सिंह के इस स्टेटस और स्किल का हवाला देते हुए ही सीबीआई ने उनका रिमांड मांगा। जांच अधिकारियों को डर है कि बाहर रहकर वे सबूतों और गवाहों को प्रभावित कर सकती हैं। कोर्ट ने उनके तर्क स्वीकार कर लिए।

7 दिन की रिमांड मांगी पर कोर्ट ने 5 दिन की ही मंजूरी दी

सीबीआई ने गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह को भोपाल जिला कोर्ट में पेश किया यहां जस्टिस शोभना भलावे की अदालत के समक्ष वे दो घंटे से ज्यादा कठघरे में खड़ी रहीं। सीबीआइ कोर्ट से पूछताछ के लिए 7 दिन की रिमांड मांगी पर कोर्ट ने 5 दिन की ही मंजूरी दी।

पहले समर्थ सिंह और बाद में गिरिबाला सिंह को कोर्ट में पेश किया

पहले सीबीआइ ने समर्थ सिंह और बाद में गिरिबाला सिंह को कोर्ट में पेश किया। बेटे को यहां दोपहर 12.35 बजे लाया गया जबकि 10 मिनट बाद पूर्व जज को लाए।

आशंका जताई कि यदि रिमांड पर नहीं रहीं तो जांच प्रभावित कर सकती हैं

सीबीआइ ने रिमांड के लिए गिरिबाला सिंह के स्टेटस और स्किल को आधार बनाया। अधिकारियों ने कोर्ट में आशंका जताई कि यदि रिमांड पर नहीं रहीं तो इनके बल पर वे जांच प्रभावित कर सकती हैं।

15 जुलाई 2021 से 28 फरवरी 2023 तक भोपाल की जिला जज रहीं

अदालत से सीबीआई ने कहा कि गिरिबाला बड़े न्यायिक पद पर रहीं हैं। उन्होंने गुजरात से क्राइम सीन मैनेजमेंट की ट्रेनिंग भी ले रखी है। ऐसे में गिरिबाला सिंह को बाहर रखने से साक्ष्य प्रभावित कर सकती हैं। इसका बचाव पक्ष के वकीलों ने विरोध नहीं किया। बता दें कि 15 जुलाई 2021 से 28 फरवरी 2023 तक गिरिबाला सिंह भोपाल की जिला जज रहीं हैं। इस प्रकार वे करीब 19 माह तक यहां पदस्थ थीं।

इन 5 आधारों पर जांच एजेंसी ने मांगा रिमांड

सीबीआइ ने तर्क दिया, गिरिबाला सिंह बड़े न्यायिक पद पर रहीं हैं। यदि रिमांड पर नहीं रहीं तो जांच प्रभावित कर सकती हैं।

जिला कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत के बाद लगातार घटनाक्रम को लेकर वे मीडिया में बनी रहीं।

गिरिबाला सिंह ने केस को दूसरी ओर मोल्ड करने की भरपूर कोशिश की है।

पूर्व जज गिरिबाला सिंह क्राइम मैनेजमेंट में दक्ष हैं, उन्होंने गुजरात से क्राइम सीन मैनेजमेंट की ट्रेनिंग ले रखी है।

सीबीआई ने कोर्ट से कहा कि गिरिबाला सिंह को बाहर रखने से वे साक्ष्य प्रभावित कर सकती है। इसका बचाव पक्ष के वकीलों ने विरोध नहीं किया।

Updated on:
30 May 2026, 7:54 AM IST
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