पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि, सरकार को कन्याओं में भेद नहीं करना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाए कि, क्या कन्यापूजन के कार्यक्रम से भी इनकम टैक्स देने वाली कन्याओं के परिवार को बाहर किया जाएगा?
भोपाल/ मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार द्वारा कन्या विवाह योजना में किया गया बदलाव अब सवालों के घेरे में आने लगा है। प्रदेश के विपक्षी दल कांग्रेस ने योजना में बदलाव को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। इस संबंध में पूर्व मंत्री पीसी शर्मा मीडिया बातचीत के दौरान कहा कि, सरकार को कन्याओं में भेद नहीं करना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि, क्या कन्यापूजन के कार्यक्रम से भी इनकम टैक्स देने वाली कन्याओं के परिवार को बाहर किया जाएगा? वहीं, दूसरी तरफ प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने सफाई देते हुए कहा कि, पहले भी योजना में आयकरदाता सम्मिलित नहीं थे।
सीएम के पीए वाले निर्देश को बताया निंदनीय
वहीं, दूसरी तरफ सीएम शिवराज द्वारा हालही में सभी विधायकों को सावधनी बरतने के निर्देश पर बातचीत करते हुए पीसी शर्मा ने कहा कि, पीए और पर्सनल स्टाफ की निष्ठा पर सवाल उठाना निंदनीय है, जिसे किसी भी स्थिति में सही नहीं माना जा सकता। ये सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की ईमानदारी और निष्ठा पर सवाल है।
शिवराज सरकार ने इस तरह किया योजना में बदलाव
आपको बता दें, मुख्यमंत्री कन्या विवाह-निकाह योजना से अब आयकरदाता और एपीएल (जो गरीबी रेखा से ऊपर हैं) उन्हें योजना से बाहर करने का फैसला लिय गया है। इसके लिए राज्य सरकार इस योजना की पात्रता शर्तों को बदलने वाली हैय़ इसके साथ ही विवाह-निकाह के 9 बड़े मुहुर्त मिलने के बजाय अब दो ही मुहुर्त दिए जाएंगे, जिसमें सामूहिक विवाह-निकाह किया जा सकेगा। मंत्रालय के सूत्रों की मानें, तो सामाजिक न्याय विभाग द्वारा इसकी तैयारी कर ली गई है।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद नियम होगा लागू
जल्द ही, मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार योजना में इस बदलाव को कैबिनेट में मंजूरी देकर लागू कर देगी। ये योजना 2021-22 से लागू की जाएगी। आपको बता दें कि, मुख्यमंत्री विवाह-निकाह योजना में हर साल तकरीबन 50 हजार शादियां कराई जाती हैं। हालांकि 2020 में कोरोना और लॉकडाउन के कारण इस योजना के तहत कोई भी विवाह या निकाह नहीं किया गया।
योजना में किये गए ये बड़े बदलाव
आपको बता दें कि, पहले इस विवाह-निकाह योजना के तहत एक से ज्यादा बार शादी की जा सकती थी, लेकिन बदलाव के बाद नई व्यवस्था के तहत एक बार से ज्यादा शादी करने वाले इस योजना के तहत विवाह नहीं कर सकेंगे। दूसरी ओर, उसी व्यक्ति को इसका लाभ मिलेगा जो बीपीएल और संबल योजना में पंजीकृत होगा। इसी तरह निकाय का निवासी, उसी निकाय के सामूहिक विवाह सम्मेलन में भाग लेगा।
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