
भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को जनआर्शीवाद यात्रा के एक दिन पहले हुए रथ पूजन के दिन विरोध का सामना करना पड़ा। यह विरोध इतना जबर्दस्त था कि पुलिस की लाख कोशिशों के बाद भी अपने निर्णय से नहीं हटा। आपको बात दें कि शुक्रवार को हुए रथ यात्रा पूजन के दौरान अचानक ही सैकड़ों निष्कासित संविदा कर्मचारी भोजपुर पहुंच गए और सड़क पर जा बैठे। उनका कहना था कि सीएम द्वारा निकाला जा रहा जनआर्शीवाद यात्रा का रथ हर विधान सभा क्षेत्र में रोका जाएगा। यात्रा रोकने का काम आज से ही किया जाएगा।
आपको बता दें कि संविदा कर्मचारियों के विरोध का मुख्य कारण सभी विभागों में मिलाकर कुल करीब 35000 संविदा कर्मचारियों को निष्कासित किया जा चुका है। इधर 80 हजार अतिथि शिक्षक भी आंदोलित हैं। इस जनआर्शीवाद यात्रा के दौरान वे अपने दर्द का प्रदर्शन करने की तैयारी कर रहे हैं।
नहीं रूका शिवराज का काफीला
जैसे ही शिवराज का काफीला भोजपुर पहुंचा, उसे देखकर संविदा कर्मचारियों ने तेज आवाज में नारेाबाजी शुरू कर दी। इसके बावजूद सीएम का काफीला बिना रूके हुए आगे बढ़ गया।
कई बार सौंपा जा चुका है ज्ञापन
इसके बाद निष्कासिकत कर्मचारियों का कहना था कि सीएम शिवराज सत्ता के नशे में चूर है। मुख्यमंत्री के इस रवैये के कारण व सरकार की अक्षमता के कारण विभिन्न विभागों से पद की समाप्ति हुई है। विभागों के विभाग प्रमुख बजट की कमी बताकर और अप्रैजल जैसी प्रक्रिया अपनाकर पद समाप्ति की कार्यवाही करते हैं। पिछले दो सालों से लगातार मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा जा चुका है। उनसे कई बार मिलकर उन्हें इस विषय से अवगत कराया गया है। पर, राजनीति के चलते अभी तक इस विषय पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
हर जिले में टीम तैयार
प्रदर्शनकारियों ने आगे बताया कि देर से ही सही पर, सभी निष्कासित कर्मचारी इस बार साथ है और एकजुटता के साथ अपने हक के लिए लड़ेगे। साथ ही आगे होने वाले विधानसभा चुनाव 18 व 19 में हम भाजपा सरकार और सीएम शिवराज का विरोध करेंगें। इस बार रणनीति के तहत सभी कर्मचारियों ने मिलकर हर जिले में विरोध के लिए अलग अलग टीम तैयार कर रखी है। यह टीमें अपने अपने जिलों में निगरानी और व्यवस्था अादि का कार्य देखेंगी।